
बलिया। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित गरिमामय विदाई समारोह में अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए बांसडीह कस्बे के वार्ड संख्या-9 निवासी डॉ. विनोद कुमार गुप्त सहित तीन कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार झा ने माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान किया और उनके स्वस्थ, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपने सौम्य स्वभाव, उत्कृष्ट कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा के लिए न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के बीच विशेष पहचान रखने वाले डॉ. विनोद कुमार गुप्त की विदाई के अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने उनके व्यक्तित्व और सेवाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।
अपने संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार झा ने कहा कि न्यायालय को डॉ. विनोद जैसे उच्च शिक्षित, ईमानदार और समर्पित कर्मचारी मिलने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उनकी कार्यनिष्ठा, विनम्र व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ी के कर्मचारियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। इसी समारोह में सेवानिवृत्त हुए दफ्तरी राजेंद्र प्रसाद एवं अर्दली रामजी प्रसाद को भी सम्मानित किया गया। न्यायिक अधिकारियों ने उनके दीर्घ एवं समर्पित सेवाकाल की सराहना करते हुए स्वस्थ और सुखमय जीवन की शुभकामनाएं दीं।
विदाई समारोह में भावुक होते हुए डॉ. विनोद कुमार गुप्त ने न्यायिक अधिकारियों, सहकर्मियों और अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन शिवेंद्र ने किया। एडीजे पुनीत कुमार गुप्ता, प्रथमकांत, प्रमोद कुमार गंगवार, राम कृपाल, सैफ अहमद, हरीश कुमार, न्यायिक अधिकारी सुश्री स्निग्धा प्रधान, सुश्री सृष्टि त्रिपाठी, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार उपाध्याय सहित न्यायालय के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
साहित्य, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी बनाई विशिष्ट पहचान
न्यायिक सेवा के साथ-साथ डॉ. विनोद कुमार गुप्त ने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। बांसडीह निवासी डॉ. गुप्त ने मुरली मनोहर टाउन (टीडी) कॉलेज, बलिया से हिंदी विषय में एमए किया। स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान उन्होंने ष्हिंदी नवगीत रू आधुनिकता बोध एवं गीतिधर्मिताष् विषय पर शोध कार्य किया। इसके बाद नवगीत संवेदना और भाषा विषय पर शोध प्रबंध प्रस्तुत कर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने स्नातक के साथ-साथ एलएलबी की शिक्षा भी हासिल की। न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए साहित्य, शोध और लेखन के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग और सम्मानजनक पहचान स्थापित की।

