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Ballia : बलिया बलिदान दिवस : चित्तू पांडेय चौराहा तक नहीं पहुंच पाए मंत्री व अफसर

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रोशन जायसवाल,

बलिया। 19 अगस्त 1942 को क्या हुआ था, क्या है इसका इतिहास, ये सब जानते है, क्योंकि उस दिन गुलाम भारत में बलिया आजाद हुआ था। यह पर्व जश्ने आजादी का है क्योंकि चित्तू पांडेय व पंडित महानंद मिश्रा समेत सैकड़ों क्रांतिकारी सुबह नौ बजे जेल से बाहर निकले थे। उनको ससम्मान तत्कालीन जिलाधिकारी जे निगम द्वारा रिहा किया गया था। इसी पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिये हर साल 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस मनाया जाता है।

तो कुंवर सिंह की प्रतिमा तक ही ठहर गये मंत्री व अफसर
जेल का फाटक खुलता है और क्रांतिकारियों का कारवां जेल से बाहर निकलता है और कुंवर सिंह चौराहा होते हुए बापू भवन क्रांति मैदान पहुंचता है। यह लगातार इसी परंपरा को लोग निभाते भी रहे है। इस बीच महापुरूषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण भी करते रहे है। जेल से निकले मंत्री, विधायक और अधिकारी कुंवर सिंह चौराहे तक ही पहुंचे यहां उन्होंने वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

इसके बाद मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, दानिश आजाद अंसारी, विधायक केतकी सिंह, जिलाध्यक्ष संजय मिश्र, नपा चेयरमैन संत कुमार मिठाईलाल, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, एसपी ओमवीर सिंह कुंवर सिंह चौराहे से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक रहे। उसके बाद मंत्री व अफसर टीडी कालेज चौराहा पर स्थित पंडित रामदहिन ओझा, शिक्षा मालवीय व पूर्व सांसद मुरली बाबू की प्रतिमा पर नहीं पहुंचे। जबकि ये जुलूस चित्तू पांडेय चौराहे तक भी नहीं पहुंच पायी।

बलिया बलिदान दिवस के हीरो रहे अजय राय
वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बलिया बलिदान दिवस के कार्यक्रम के हीरो रहे। क्योंकि वह एक दिन पहले बलिया आ गये थे और जेल में सबसे पहले पहुंचे थे। वहां से अपने कांग्रेसी नेताओं के साथ कुंवर सिंह, टीडी कालेज चौराहा पहुंचे, वहां सेनानियों को माल्यार्पण करने के बाद चित्तू पांडेय चौराहा पर आकर उनकी प्रतिमा पर शीश झुकाया। लेकिन भाजपा के मंत्री, विधायक व कार्यकर्ता चित्तू पांडेय चौराहे तक नहीं पहुंचे।

चित्तू पांडेय प्रतिमा पर नाम मात्र लोग ही पहुंचे
चित्तू पांडेय परिवार से जुड़े विनय पांडेय के आंखों में आंसू उस वक्त टपक पड़ा जब मंत्री व अधिकारी चित्तू पांडेय प्रतिमा स्थल पर नही पहुंचे। उन्होंने आक्रोश भरे शब्दों में कहा कि बलिया बलिदान दिवस के आयोजन को असफल बनाने का प्रयास किया गया। वीर कुंवर सिंह के प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद आगे मंत्री व अधिकारियों का काफिला नहीं बढ़ा, जिसके कारण पुरानी परंपरा का ध्वस्त करने का प्रयास किया गया।

यहीं नहीं टाउन हाल क्रांति मैदान को भी ठीक ठाक नहीं रखा गया। जिसके चलते कार्यक्रम स्थल पर लोग नहीं पहुंच पाये और जो पहुचें वे नाम मात्र थे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को फीका करने का प्रयास किया गया। टाउन हाल में अगर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की गई होती तो पुरानी परंपरा में और चार चांद लगता।

बलिया बलिदान दिवस कार्यक्रम पर रोष, आयोजन समिति ने उठाए सवाल
बलिया। 19 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक स्मृति में हर वर्ष आयोजित होने वाला बलिया बलिदान दिवस जुलूस इस बार विवादों में घिर गया। आयोजन समिति ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने इस वर्ष पूरे कार्यक्रम को अनमने ढंग से आयोजित किया और परंपरा के अनुरूप व्यवस्थाएं नहीं की गईं।


शेरे बलिया चित्तू पांडेय स्मारक समिति के संयोजक विनय पांडेय ने कहा कि परंपरा के अनुसार 19 अगस्त को जिला जेल का फाटक जिलाधिकारी द्वारा खोला जाता है और सेनानियों को माल्यार्पण के साथ जुलूस विभिन्न स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए टाउन हॉल बापू भवन तक पहुंचता है। लेकिन इस बार प्रशासन केवल औपचारिकता निभाते हुए जेल का गेट खोलकर जुलूस को रवाना कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रीगण और अधिकारी जुलूस से बीच में ही लौट गए तथा शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय की प्रतिमा पर माल्यार्पण तक नहीं किया, जो सेनानियों के सम्मान के साथ बड़ा अन्याय है। साथ ही, 1942 में स्वतंत्रता की घोषणा स्थल क्रांति मैदान बापू भवन पर भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। विनय पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और मंत्रीगण ने इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो अगले वर्ष आयोजन समिति अपने बल पर कार्यक्रम करेगी।

बलिदान दिवस पर कांग्रेस का विरोध, कहा सेनानियों का हुआ अपमान
बलिया। बलिदान दिवस पर आयोजित सेनानी सम्मान यात्रा को लेकर विवाद सामने आया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष/जोनल कोऑर्डिनेटर संगठन राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सुबह 9 बजे परंपरा अनुसार जेल का फाटक खोलकर यात्रा प्रारंभ हुई, लेकिन बाद में जिला प्रशासन के दबाव में फाटक दोबारा खोलकर प्रदेश सरकार के मंत्री और विधायकों को जेल परिसर में प्रवेश कराया गया।
उन्होंने इसे सेनानियों का अपमान बताते हुए कहा कि बागी बलिया की धरती पर कांग्रेसजन इस तरह का अनादर बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार और जिला प्रशासन को इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसी मुद्दे पर स्थानीय डाक बंगले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेसजनों ने विरोध दर्ज कराया। मौके पर पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडे, बृजेश सिंह गाट, राजेश सिंह, घनश्याम सहाय, सतेन्द्र ओझा, ओम प्रकाश सिंह, अनुभव तिवारी गोलू, अभिजीत सिंह, अवधेश ठाकुर, मदन यादव, वीरेंद्र कुंवर, विशाल चौरसिया समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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