2027 में सातों विधानसभा सीटों पर कमल खिलाने की रणनीति
रोशन जायसवाल,
बलिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बलिया की उन विधानसभा सीटों पर भी लगातार मंथन चल रहा है, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में भी बलिया की राजनीतिक स्थिति, संगठन और संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा होने की बात सामने आ रही है।
भाजपा की रणनीति में बलिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के सामने जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर मजबूत स्थिति बनाने की चुनौती है। 2022 में भाजपा को बलिया नगर और बांसडीह में जीत मिली थी, जबकि बैरिया, सिकंदरपुर और फेफना में उसे हार मिली। बेल्थरा रोड में भी भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे, जबकि रसड़ा में पार्टी मुकाबले में पीछे रही।
दिलचस्प बात यह है कि 2017 में भाजपा ने बलिया की पांच सीटों बैरिया, बेल्थरारोड, सिकंदरपुर, फेफना और बलिया नगर पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2022 में पार्टी का प्रदर्शन घटकर दो सीटों तक सिमट गया। ऐसे में 2027 के लिए 2017 के प्रदर्शन को फिर से हासिल करने की रणनीति पर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है।
2022 में भाजपा की ओर से जीती गई दोनों सीटों
बलिया नगर और बांसडीह पर क्षत्रिय समाज के विधायक निर्वाचित हुए। बलिया नगर से दयाशंकर सिंह और बांसडीह से केतकी सिंह ने जीत दर्ज की थी।
इसी के बाद अब राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा बैरिया और बांसडीह क्षेत्र में संभावित नए चेहरे को लेकर है। खासकर बैरिया में नए क्षत्रिय चेहरे को मौका दिए जाने की चर्चा ने स्थानीय राजनीति को गर्म कर दिया है। हालांकि अभी इसे लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा की नई रणनीति में उम्मीदवार चयन के दौरान जमीनी पकड़, संगठन में सक्रियता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को महत्व दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
हारी हुई सीटों पर कैसे वापसी करेंगी भाजपा, चर्चा तेज
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसे टिकट मिलेगा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि 2027 में भाजपा बलिया की हारी हुई सीटों पर वापसी के लिए कौन-सा राजनीतिक समीकरण तैयार करती है। बैरिया और बांसडीह में नए चेहरे की चर्चा ने इस सवाल को और दिलचस्प बना दिया है।
