बलिया। शारदीय नवरात्र के सप्तमी को पंडालों में आदि शक्ति की प्रतिमाएं विधि विधान से स्थापित होने के बाद भक्तों के दर्शन के लिए खुल गई। इस बार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पंडालों को बेहतर व आकर्षक समितियों ने बनाया है, जिससे पंडाल भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। भक्तों को माता रानी के दर्शन के लिए त्रिकूटा पर्वत माला से होकर जाना पड़ेगा। वहीं कुछ जगहों पर कैलाश पर्वत को श्री जगन्नाथ पुरी धाम मंदिर में माता रानी विराजमान होंगी।
बंगाली समाज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खोला मुखपट
शहर के जमुना पाठशाला और सेंट थामस स्कूल में बंगाली समाज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुखपट खोला। कमेटी के सचिव गौतम सान्याल ने बताया कि बंगाली समाज 1948 से यहां पूजा कर रहा है। यह परंपरा आज भी बंगाली रीति-रिवाज से निभाई जा रही है। इस साल पूजा का 79वां साल है। मूर्तियां बंगाल के कारीगरों ने बनाई हैं और भोग बनाने वाले भी कोलकाता से आए हैं। विजयादशमी के दिन सिंदूरदान और सिंदूर खेला होगा।
636 जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित
बलिया जिले के 22 थाना क्षेत्रों में 636 जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। विसर्जन के लिए 52 स्थान तय किए गए हैं। सुरक्षा के लिए जिले को 6 जोन और 22 सेक्टरों में बांटा गया है। सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।
त्रिकुटा पहाड़ी में माता रानी का भक्तों ने किया दर्शन
शहर से सटे गोठहुली गांव में त्रिकुटा पहाड़ी में माता रानी का भक्तों ने दर्शन किया। वहीं पहाड़ी की शिखर पर बाबा भोलेनाथ विराजमान थे। इनके दर्शन व पूजन के लिए पहाड़ पर चढ़ने के लिए बनाया गया है। पहाड़ पर हरियाली की व्यवस्था की गई है। समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार दीपू ने बताया कि भीड़ को देखते हुए एक बार 20 लोगों को पहाड़ पर चढ़ने की अनुमति होगी। इस पूरे पंडाल को तैयार करने में करीब 15 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं।
जापलिनगंज कैलाश पर्वत की गुफा मे मां का हुआ दर्शन
शहर के जापलिनगंज में इस बार कैलाश पर्वत की गुफा में भक्तों ने माता रानी का दर्शन किया। इसके लिए करीब दो माह से तैयार किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष रजत सोनी ने बताया कि पंडाल को कैलाश पर्वत स्वरूप में बनाया गया है। इसके अंदर ही मां का दर्शन भक्तों को होगा। करीब 43 साल से इस स्थल पर मां की प्रतिमाएं स्थापित होती है।
