
कुल्हाड़ियां के विस्थापित ग्रामीणों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिलाधिकारी से की मुलाकात
बलिया। विकास खंड सोहांव की ग्राम पंचायत कुल्हाड़ियां के लगभग 36 वर्षों से बेघर होकर विस्थापन का दंश झेल रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए विधानसभा फेफना के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री नारद राय ने सार्थक पहल की है। मंगलवार को पूर्व मंत्री प्रभावित ग्रामीणों को साथ लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से मुलाकात कर उनकी वर्षों पुरानी समस्या से अवगत कराया।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए पत्रक के अनुसार, वर्ष 1989-90 में गंगा नदी के कटान से कुल्हाड़ियां गांव के अनेक परिवारों के मकान नदी में समा गए थे। इसके बाद से प्रभावित परिवार लगातार सुरक्षित स्थान पर बसने और आवास की व्यवस्था किए जाने की मांग करते रहे। पत्रक में यह भी उल्लेख है कि कटान के बाद अनेक परिवारों को अस्थायी रूप से इधर-उधर शरण लेनी पड़ी और आज भी कई परिवार स्थायी आवास की सुविधा से वंचित हैं। पूर्व मंत्री नारद राय ने जिलाधिकारी के समक्ष पीड़ित परिवारों की समस्या को गंभीरता से रखते हुए उनके पुनर्वास की मांग की।
उन्होंने कहा कि साढ़े तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का जीवन जी रहे इन परिवारों को अब स्थायी समाधान मिलना चाहिए। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि पात्र बेघर परिवारों को जमीन आवंटित कराने की प्रक्रिया पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। जिलाधिकारी के इस आश्वासन के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे बाढ़ पीड़ित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद उन्हें अपने स्थायी आशियाने की उम्मीद दिखाई दी है।
पूर्व मंत्री नारद राय ने कहा कि कुल्हाड़ियां के बाढ़ पीड़ितों का दर्द अत्यंत पुराना है और उनका पुनर्वास मानवीय दृष्टि से आवश्यक है। उन्होंने भरोसा जताया कि जिला प्रशासन की पहल से इन परिवारों को न्याय मिलेगा और लगभग 36 वर्षों बाद उनके सिर से विस्थापित होने का कलंक हटेगा। मीडिया के सवाल पर पूर्व मंत्री नारद राय ने इसके लिए जनप्रतिनिधियों को ही जिम्मेदार माना। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि विनोद सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरिनारायण राय, पूर्व प्रधान गंगा सागर, अनिल राय, गोपाल उपाध्याय, सुरेंद्र सिंह, ब्रह्मानंद सिंह, कमलेश राय, विनोद राय, मनू राम, हरिशंकर राम, मुंशीजी राम, आशुतोष कुमार आदि शामिल रहे।

