
वट सावित्री एवं शनि अमावस्या पर विशेष
शनि अमावस्या व वट सावित्री पर विशेष संयोग, महिलाओं में उत्साह
बलिया। सावित्री का अर्थ सत्य के साथ हर परिस्थिति में अपने जीवन साथी का साथ देने का संदेश देता है। इससे ज्ञात होता है कि पतिव्रता स्त्री में इतनी ताकत होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियों अपने पति के लंबी आयु स्वास्थ्य और उन्नति एवं संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र जो सौभाग्य व वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। इस दिन वृष राशि में चतुर्ग्रही योग बनना बेहद खास माना जा रहा है। चारों ग्रहों के एक राशि में होने पर चतुर्ग्रही योग बनता है। ऐसी मान्यता है कि इस योग से जनजीवन में मधुरता आती है व कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन वृष राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और राहु ग्रह विराजमान होंगे। इसलिए चतुर्ग्रही योग बन रहा है।
वट वृक्ष के समक्ष पूजा करने से पूरी होती है मनोकामनाएं
वटसावित्री व्रत में वट यानी बरगद के साथ-साथ सत्यवान-सावित्री व यमराज की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों देव वास करते हैं। अतः वटवृक्ष के समक्ष पूजा करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर 5, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए। वट के पत्ते के गहने पहनकर व सावित्री की कथा सुनें, बाँस के पंखे से सत्यवान-सावित्री को हवा दें।
अखंड सौभाग्य की कामना करतीं हैं महिलाएं
कुछ महिलायें तीन दिन के जगह केवल एक दिन का ही व्रत रखती हैं। बाँस की टोकरी में वस्त्र, फल आदि वस्तुएं ब्राह्मण को दान करती हैं व पूजा करने के बाद घर आकर अपने पति को हवा देती हैं व उनका आशीर्वाद लेती हैं। घर पर चौकी का व्रत उत्तर भारत में सत्यवान-सावित्री के नाम से विशेष रूप से प्रचलित है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

