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Ballia : 2027 की जंग के लिए पूर्वांचल में सियासी बिसात बिछनी शुरू, जातीय समीकरण साधने में जुटे दल

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रोशन जायसवाल,
बलिया।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। वैसे पूर्वांचल क्षेत्र को सत्ता की कुंजी माना जाता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के निगाह पूर्वांचल के सीटों पर रहती है। भाजपा, सपा, बसपा और सुभासपा, निषाद पार्टी समेत अन्य दल यहां बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और जातीय समीकरण साधने में जुट गए हैं।


भले ही चुनाव में अभी समय हो लेकिन राजनीतिक दलों में तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है और अंदरखानों में यह चर्चा है कि सर्वे भी पार्टियां कराना शुरू कर दी है। जहां तक मुद्दों की बात हो वहीं भाजपा विकास और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चुनावी जमीन तैयार कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारियां नेताओं में तय कर दी है। बसपा भी अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को दोबारा मजबूत करने के प्रयास में जुटी हुई है। वहीं सुभासपा और निषाद पार्टी भी अपने वोट बैंक को सहेजने में जुटी हुई है।

बीजेपी का फोकस बूथ मैनेजमेंट और ओबीसी वोट बैंक
भाजपा पूर्वांचल में संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी स्तर पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर सर्वे कराए जाने की चर्चा है। खराब प्रदर्शन या जन असंतोष झेल रहे विधायकों के टिकट काटे जाने की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि सत्ता विरोधी माहौल को कम किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार पार्टी गैर-यादव पिछड़ी जातियों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रही है। महाराजगंज सांसद पंकज चौधरी की सक्रियता को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा निषाद पार्टी और अपना दल (एस) जैसे सहयोगी दलों के साथ सीटों के तालमेल और संयुक्त कार्यक्रमों पर भी मंथन कर रही है।

सपा का पीडीए फॉर्मूला गांवों तक पहुंचाने की तैयारी
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पूर्वांचल में ‘पीडीए’ फॉर्मूले को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। पार्टी गैर-यादव पिछड़ी जातियों जैसे राजभर, निषाद, चौहान समेत छोटे सामाजिक समूहों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने में जुटी है।
सपा संगठन में युवाओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। जिला और फ्रंटल इकाइयों में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा रही है। साथ ही बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और बंद चीनी मिलों जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार पर हमले की तैयारी है।

बसपा की नजर दलित-ब्राह्मण समीकरण पर
बहुजन समाज पार्टी पूर्वांचल में अपने पुराने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग मॉडल को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। पार्टी उन सीटों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मजबूत स्थानीय उम्मीदवारों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

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