
कारगिल शहीद राम समुझ यादव के शहीद दिवस पर पहुंचे पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.पी. मलिक और पूर्व सैनिक दीप चंद
रोशन जायसवाल,
आजमगढ़ में कारगिल शहीद राम समुझ यादव के शहीद दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.पी. मलिक और पूर्व सैनिक दीप चंद पहुंचे। इस दौरान शहीद राम समुझ यादव के अदम्य साहस और देश के लिए दिए गए सर्वाेच्च बलिदान को याद किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति और सैनिकों के सम्मान का भाव देखने को मिला।
देखिए दीप चंद्र से हुई विशेष बातचीत के कुछ अंश…

खास बात यह रही कि एक ओर कारगिल युद्ध के दौरान सेना का नेतृत्व करने वाले पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.पी. मलिक मौजूद रहे, तो दूसरी ओर आतंकवादी हमले में अपने दो पैर और एक हाथ गंवाने के बावजूद हौसले के साथ जीवन जी रहे पूर्व सैनिक दीप चंद भी कार्यक्रम में पहुंचे।

देश के लिए गंवाए दो पैर और दाहिना हाथ, फिर भी हौसला बुलंद
आजमगढ़ में देश के उस जांबाज सिपाही से खास बातचीत हुई, जिसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने दोनों पैर और दाहिना हाथ गंवा दिया, लेकिन देश के प्रति उसका जज्बा आज भी अटूट है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर को याद करते हुए दीप चंद्र ने बताया कि उस समय जवानों के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता सिर्फ देश की रक्षा थी। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच भी जवानों के कदम पीछे नहीं हटते थे।

उन्होंने कहा कि शरीर का कोई अंग देश से बड़ा नहीं होता। अगर देश की रक्षा के लिए जान भी चली जाए तो एक सैनिक के लिए इससे बड़ा सम्मान कुछ नहीं। दीप चंद्र की कहानी सिर्फ एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि उस हौसले की कहानी है जो शरीर के अंग खोने के बाद भी नहीं टूटा।

