You can find updated Android installation instructions and app information on BC Game APK India.

Asarfi

जानलेवा रेटिनोब्लास्टोमा का खतरा : वाराणसी में 20 बच्चों की आंखों में कैंसर, 40 प्रतिशत की आंख निकालनी पड़ी

width="500"

वाराणसी। छोटे बच्चों में होने वाला दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक आंखों का कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा तेजी से सामने आ रहा है। एक महीने से लेकर पांच साल तक के 20 बच्चों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है, जिनका इलाज बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में चल रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, इनमें से करीब 40 फीसदी बच्चों की जान बचाने के लिए उनकी कैंसरग्रस्त आंख निकालनी पड़ी, जबकि 60 फीसदी बच्चों का इलाज कीमोथेरेपी और माइक्रो सर्जरी से किया जा रहा है। इस बीमारी का एक प्रमुख लक्षण हैकृअंधेरे या फ्लैश लाइट में बच्चे की आंखों का बिल्ली की तरह चमकना।
संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि कई मामलों में कैंसर आंख के अंदर तेजी से फैल चुका था और कुछ में यह दृष्टि तंत्रिका (ऑप्टिक नर्व) के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचने की स्थिति में था। ऐसे मामलों में तुरंत सर्जरी कर आंख निकालना जरूरी हो गया, ताकि बच्चे की जान बचाई जा सके।

क्या है रेटिनोब्लास्टोमा?
यह एक दुर्लभ प्रकार का आंख का कैंसर है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों में होता है। जब रेटिना की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बन जाता है। करीब 40ः मामलों में यह बीमारी आनुवांशिक (जेनेटिक) कारणों से होती है।

केस- 1
भभुआ (बिहार) के 8 माह के बच्चे की दाहिनी आंख की पुतली हल्की रोशनी में बिल्ली की तरह चमकती थी। फोटो खींचते समय फ्लैश गन की वजह से आंख में लाल घेरे के बजाय सफेद धब्बा दिखाई देने लगा। बीएचयू में जांच के दौरान पता चला कि बच्चे की आंख में कैंसर है। ट्यूमर शुरुआती चरण (स्टेज-बी) में था। कीमो-रिडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इससे ट्यूमर सिकुड़ गया। इसके बाद लेजर थेरेपी दी गई। बच्चे की आंख की रोशनी और जान बच गई।

केस- 2
गाजीपुर की 3 वर्षीय बच्ची तिरछा देख रही थी। माता-पिता ने इसे साधारण समझकर नजरअंदाज किया। धीरे-धीरे आंख में सूजन और लालपन बढ़ने लगा और बच्ची को उस आंख से कम दिखाई देने लगा। बीएचयू में जांच में सामने आया कि ट्यूमर बड़ा हो चुका था और ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) तक पहुंचने वाला था। संक्रमण को मस्तिष्क तक फैलने से रोकने के लिए डॉक्टरों को सर्जरी करनी पड़ी। बच्ची की जान बचा ली गई लेकिन आंख निकालनी पड़ी।

केस- 3
वाराणसी के पिंडरा निवासी 14 माह के बच्चे की दोनों आंखों में असामान्य चमक और पुतलियों का फैलाव देखा गया। बच्चा खिलौनों पर फोकस नहीं कर पा रहा था। जांच में पता चला कि यह बाइलेटरल रेटिनोब्लास्टोमा है। दोनों आंखों में कैंसर। यह जेनेटिक म्यूटेशन के कारण हुआ था। बीएचयू के विशेषज्ञों ने सर्जरी और विशेष कीमोथेरेपी से एक आंख की रोशनी को बचा लिया। दूसरी आंख की रोशनी कम हो गई है।

जानलेवा है ये कैंसर
डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि जब रेटिना की कोशिकाएं परिपक्व होने के बजाय असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं, तो वे ट्यूमर (गांठ) का रूप ले लेती हैं। ट्यूमर आंख के भीतर ही बढ़ता रहता है। यदि इलाज न मिले, तो यह ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे हड्डियों या लिम्फ नोड्स, तक भी फैल सकता है जो जानलेवा साबित होता है।

ये हैं लक्षण
कम रोशनी में या कैमरे की फ्लैशलाइट पड़ने पर बच्चे की पुतली काली दिखने के बजाय सफेद, चांदी जैसी या सुनहरी चमके।
बच्चे की दोनों आंखों का एक दिशा में न होना। यदि बच्चा तिरछा देख रहा है, तो यह ट्यूमर के कारण दृष्टि में रुकावट के संकेत हो सकते हैं।
बिना किसी स्पष्ट संक्रमण या चोट के आंख का लंबे समय तक लाल रहना।
ट्यूमर के बढ़ने के कारण आंख का बाहर की ओर उभरना या उसमें लगातार सूजन रहना।
आंख की पुतली के रंग में अचानक बदलाव आना।
बच्चे का खिलौनों या वस्तुओं पर फोकस न कर पाना, चलते समय चीजों से टकराना या बार-बार आंखें मलना।
रोशनी पड़ने पर भी पुतली का सामान्य रूप से न सिकुड़ना।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *