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Ballia : सनबीम स्कूल के मेधावी उत्कर्ष उज्ज्वल ने प्राप्त की 6000 की राष्ट्रीय डाक छात्रवृत्ति

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बलिया। विद्यार्थियों में डाक टिकट संग्रह (फिलाटेली) जैसी रचनात्मक और ज्ञानवर्धक रुचि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डाक विभाग भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम में बलिया केसनबीम स्कूल के कक्षा 6 के होनहार छात्र उत्कर्ष उज्ज्वल ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में जीत दर्ज कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस प्रतियोगिता में विजेता के रूप में उत्कर्ष को प्रतिवर्ष 6000 रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।


बता दें कि इस गौरवशाली राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत पूरे भारत में कुल 920 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की गईं हैं। प्रतियोगिता में देश भर सहित उत्तर प्रदेश ईस्ट सर्किल से कक्षा 6 से 9 तक के लगभग 3000 से 5000 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। अगर केवल बलिया जिले की बात करें, तो यहां से विभिन्न स्कूलों के कुल 47 छात्र-छात्राओं ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इनमें से कक्षा 6 की श्रेणी में सनबीम स्कूल बलिया से सरूपा सान्वी ऐ4 उत्कर्ष उज्जवल सहित कुल 12 विद्यार्थियों ने कड़ी टक्कर दी, जिसमें उत्कर्ष उज्ज्वल विजेता बनकर उभरे।


डाक विभाग का यह आयोजन विद्यार्थियों में फिलाटेली को एक रोचक, रचनात्मक एवं शिक्षाप्रद शौक के रूप में लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। उत्कर्ष की इस सफलता पर सनबीम स्कूल प्रबंधन के सचिव श्रीवत्स, निदेशक डॉ कुंवर अरुण सिंह, प्रधानाचार्या डॉ अर्पिता सिंह एवं सभी शिक्षकों और स्थानीय प्रबुद्धजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उत्कर्ष के सार्थक भविष्य की कामना की है।


इस गौरवपूर्ण अवसर पर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक डॉ. कुंवर अरुण सिंह ने उत्कर्ष को बधाई और कहा कि आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे स्क्रीन पर समय बिताते हैं, वहीं उत्कर्ष ने फिलाटेली (डाक टिकट संग्रह) जैसे ज्ञानवर्धक और रचनात्मक शौक को चुना। डाक टिकट केवल कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और विज्ञान के चलते-फिरते दस्तावेज हैं। उन्होंने अन्य विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हर बच्चे में एक विशेष हुनर होता है। उत्कर्ष की यह सफलता बलिया के अन्य 46 प्रतिभागियों सहित सभी छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि वे भी लीक से हटकर सोचें और देश के पटल पर अपनी पहचान बनाएं।


प्रधानाचार्या डॉ अर्पिता सिंह ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उत्कर्ष के माता-पिता और विद्यालय के मार्गदर्शक शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानना और उसे सही दिशा देना ही सच्ची शिक्षा है।

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