
बांसडीह में 2027 से पहले भाजपा विधायक के सामने सहयोगी दलों को साधने की चुनौती
बलिया। बांसडीह विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के साथ चल रहे सुभासपा और निषाद पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की कथित नाराजगी अब भाजपा विधायक केतकी सिंह के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। सवाल यही है कि चुनाव से पहले केतकी सिंह दोनों सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी दूर कर पाएंगी या नहीं?
बांसडीह की राजनीति में 2017 का चुनाव आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उस चुनाव में भाजपा और सुभासपा के गठबंधन से अरविंद राजभर मैदान में थे, जबकि केतकी सिंह ने बगावत कर चुनाव लड़ा था। माना गया कि वोटों के बंटवारे का फायदा समाजवादी पार्टी को मिला और यह सीट उसके खाते में चली गई। अरविंद राजभर की हार के बाद सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर की नाराजगी की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में रही।
इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर बदली। केतकी सिंह भाजपा के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरीं और जीत दर्ज की। हालांकि चुनाव के कुछ समय बाद उनके और निषाद पार्टी प्रमुख डॉ. संजय निषाद के बीच दूरी की चर्चा शुरू हो गई। निषाद पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी यह नाराजगी सामने आती रही कि उनके नेता का विधायक की ओर से अपेक्षित सम्मान नहीं हुआ। इसी नाराजगी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में यह चर्चा भी है कि लखनऊ में आयोजित पार्टी के वर्षगांठ समारोह में केतकी सिंह शामिल नहीं हो सकीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को भाजपा के पक्ष में पूरी तरह सक्रिय करने के लिए केतकी सिंह क्या कदम उठाएंगी?
50 हजार सुभासपा और 32 हजार निषाद वोट का दावा
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में सुभासपा के करीब 50 हजार और निषाद पार्टी के करीब 32 हजार वोट होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों को आधिकारिक आंकड़े नहीं माना जा सकता, लेकिन अगर सहयोगी दलों के प्रभाव को जोड़कर देखा जाए तो 2027 में बांसडीह का चुनावी समीकरण काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2022 में सुभासपा भाजपा के साथ नहीं थी, इसके बावजूद केतकी सिंह चुनाव जीतने में सफल रहीं। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या सुभासपा का पूरा वोट तब समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया था? अगर नहीं, तो 2027 में भाजपा-सुभासपा गठबंधन का वास्तविक लाभ किसे और कितना मिलेगा?
वहीं, 2022 में भाजपा के साथ निषाद पार्टी के गठबंधन का भी चुनावी प्रभाव रहा। ऐसे में 2027 में निषाद वोट का कितना हिस्सा भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट रहता है, यह भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला बड़ा सवाल होगा।
मुख्यमंत्री की नजर में मजबूत चेहरा?
इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच भाजपा के अंदर केतकी सिंह को लेकर तस्वीर फिलहाल सकारात्मक बताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुए और तीनों कार्यक्रमों को सफल माना गया। भाजपा संगठन की नजर में भी केतकी सिंह को एक सक्रिय और बेहतर महिला नेत्री के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन चुनाव सिर्फ संगठन और नेतृत्व की पसंद से नहीं जीते जाते। सहयोगी दलों के वोटर, स्थानीय समीकरण और नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
क्या 2027 के चुनाव से पहले केतकी सिंह ओपी राजभर और डॉ. संजय निषाद के साथ-साथ दोनों दलों के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर पाएंगी?
या फिर बांसडीह में सहयोगी दलों के वोटों का समीकरण ही चुनाव की दिशा बदल देगा?
बांसडीह से कौन लड़ेगा चुनाव और किसके पक्ष में बनेगा सियासी समीकरण?
बलिया आजकल से रोशन जायसवाल की रिपोर्ट।

