Ballia : दरौली-खरीद पीपा पुल चालू, यूपी-बिहार का आवागमन फिर हुआ सुचारू

सिकंदरपुर (बलिया)। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे दो बड़े राज्यों को जोड़ने के लिए घाघरा नदी पर हर वर्ष पीपा पुल का निर्माण किया जाता है। यह पुल सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए आवागमन, व्यापार और सामाजिक संपर्क की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जलस्तर बढ़ने के कारण इस पीपा पुल को प्रत्येक वर्ष जून माह में खोल दिया जाता है, जबकि नदी का जलस्तर घटने के बाद पुनः इसका निर्माण कराया जाता है।

इसी क्रम में दरौली-खरीद पीपा पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रविवार को इसे आम जनता के लिए सुचारू रूप से चालू कर दिया गया। इसकी जानकारी संबंधित ठेकेदार सुनील राय ने दी। पीपा पुल के चालू होते ही उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच एक बार फिर सीधा संपर्क बहाल हो गया है।
पुल के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच दैनिक यात्रियों, किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से पुल के चालू होने का इंतजार कर रहे स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात बताया है। पुल के अभाव में लोगों को नाव या लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा था, जिससे समय, श्रम और आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। हालांकि, इस वर्ष भी पीपा पुल के निर्माण में देरी हुई।
हर वर्ष 15 नवंबर तक तैयार हो जाता है पुल, इस बार हुई देरी
जानकारी के अनुसार हर साल यह पुल 15 नवंबर तक तैयार हो जाता है, लेकिन इस बार निर्धारित समय सीमा से काफी बाद में इसे चालू किया जा सका। निर्माण में देरी के कारण कुछ समय तक स्थानीय लोगों और यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खासकर मरीजों, छात्रों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। घाघरा नदी पर एक स्थायी समाधान के रूप में लगभग आठ वर्षों से पक्के पुल का निर्माण कार्य भी चल रहा है, लेकिन अभी तक यह कार्य केवल पिलरों के निर्माण तक ही सीमित रह गया है। पक्के पुल का निर्माण अधूरा रहने से लोगों की उम्मीदें अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं।
स्थानीय लोगों ने के अनुसार…
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पक्का पुल बनकर तैयार हो जाता, तो हर साल पीपा पुल पर निर्भरता समाप्त हो जाती और आवागमन स्थायी रूप से आसान हो जाता। वर्तमान में पीपा पुल के चालू होने से क्षेत्र में राहत का माहौल है। जनवरी माह में लग्न शुरू होने के कारण वैवाहिक कार्यक्रमों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग एक-दूसरे के राज्यों में आसानी से आ-जा सकेंगे और आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों को नया संबल मिलेगा।

