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Ballia : डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का लखनऊ में सर्वदलीय नागरिक अभिनंदन, उत्तर प्रदेश गौरव मानद उपाधि से सम्मानित

लखनऊ। गीत ऋषि स्व. गोपालदास नीरज की स्मृति में रविवार को लखनऊ काव्य, गीत, गजल संगम एवं सम्मान समारोह का आयोजन कृष्णानगर के अलीनगर सुनेहरा स्थित एस.एस.डी. पब्लिक स्कूल परिसर में किया गया। अखिल भारतीय लेखक कवि कलाकार परिषद एवं काशी हिन्दी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में अंतरराष्ट्रीय वक्ता, लेखक, विचारक एवं समाज सुधारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का विशेष सर्वदलीय नागरिक अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उन्हें उत्तर प्रदेश गौरव मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य धर्मेंद्र महाराज के सानिध्य तथा काशी हिन्दी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ. धर्मदेव यादव धर्मेश की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय कवि एवं गीतकार डॉ. जय सिंह आर्य (दिल्ली) रहे। पूर्व शिक्षा निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. महेंद्र सिंह गौर तथा कैप्टन सरोज सिंह अतिविशिष्ट अतिथि रहे। डॉ. गीता पांडेय अपराजिता और हरियाणा की युवा कवयित्री डॉ. सीमा रांगा इंद्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
समारोह में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के साहित्यिक, दार्शनिक एवं वैचारिक योगदान को रेखांकित करते हुए आचार्य धर्मेंद्र ने कहा कि डॉ. उपाध्याय भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन के विशेषज्ञ हैं और भारतीय आस्तिक दर्शन के अध्ययन एवं व्याख्यान के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

25 ग्रंथों की रचना कर चुके है डा.विद्यासागर
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. उपाध्याय अब तक 25 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं। उनकी कृतियों में दर्शन, अध्यात्म, इतिहास, संस्कृति और साहित्य के विविध आयाम दिखाई देते हैं। ‘मृत्यु मीमांसा’, ‘अथातो मृत्यु जिज्ञासा’, ‘अहम् ब्रह्मास्मि’, ‘सनातन दर्शन का मूल-प्रस्थानत्रयी’, ‘अष्टावक्र गीता-अभिनव भाष्य’, ‘गीता तत्त्व चिंतन’, ‘ब्रह्माण्ड का सोर्स कोड-सांख्य दर्शन’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा’ सहित अनेक कृतियों में उन्होंने गंभीर वैचारिक प्रश्नों को अपनी दृष्टि से प्रस्तुत किया है।
हाल में प्रकाशित उनकी ऐतिहासिक कृति ‘संक्रान्ति का संहार-पानीपत की महागाथा’ भी चर्चा में रही है। तृतीय पानीपत युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कृति 14 जनवरी 1761 की ऐतिहासिक घटनाओं को कथा के माध्यम से प्रस्तुत करती है। वहीं ‘काल यात्रा: वेद से बर्लिन तक’ में इतिहास, साहित्य और वैचारिक चिंतन के विविध पक्ष सामने आते हैं।

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी
समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 108 साहित्यकारों को गीत ऋषि स्व. गोपालदास नीरज स्मृति सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख संयोजन कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने किया। स्वागत संरक्षक के रूप में डॉ. पारसनाथ श्रीवास्तव, डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी ओम, डॉ. प्रमोद वाचस्पति सलील जौनपुरी, कवि नन्दलालमणि त्रिपाठी पीतांबर, डॉ. ओमप्रकाश पाण्डेय निर्भय, पवन कुमार सिंह एडवोकेट, कवि रविन्द्र पाण्डेय निर्झर प्रतापगढ़ी और डॉ. वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर की भूमिका रही। देहदानी रामानंद सैनी एडवोकेट स्वागताध्यक्ष रहे। स्वागत संयोजन में कवि गिरिराज शर्मा ठेठ मलिहाबादी, डॉ. राजेश शर्मा, कवि अनुज प्रताप सिंह अनुज, डॉ. राम-लखन वर्मा, नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता तथा युवा कवि अमित कुमार शर्मा शामिल रहे। धन्यवाद एवं आभार डॉ. अनीता मिश्रा और मुख्य प्रदेश महामंत्री डॉ. सुमति श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।

इन्होंने दी बधाई
डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के सम्मान पर विद्वत् समाज में हर्ष व्यक्त किया गया। कौशलेंद्र गिरी जी महाराज, प्रोफेसर कामेश्वर उपाध्याय, डॉ. शैवेश्वर दत्त पाण्डेय, डॉ. अनिल कुमार तिवारी, करुणानिधि तिवारी, हरेंद्र नाथ मिश्रा, जयनाथ सिंह, कामेश्वर प्रसाद, राधेश्याम यादव, डॉ. सुरेश गुप्ता, संतोष कुमार वर्मा और आकाश तिवारी सहित अनेक विद्वानों ने उन्हें बधाई दी।

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