
बलिया। दुबहर थाना क्षेत्र में जनेश्वर मिश्र सेतु के नीचे गंगा नदी में पूजन सामग्री विसर्जित करने गए अधिवक्ता दंपति की डूबकर मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं हादसे की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार ओमप्रकाश दूबे (58) और उनकी पत्नी इंदु देवी (53) शहर के टैगोर नगर में रहते थे। मूल रूप से दोनों बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के फरसाटार (छितौनी) के रहने वाले थे। सोमवार को घर में सुख-समृद्धि के लिए रुद्राभिषेक कराया गया था। शाम करीब 7ः30 बजे दोनों पूजा सामग्री गंगा में विसर्जित करने जनेश्वर मिश्र सेतु पहुंचे थे। नदी में बाढ़ के कारण जलस्तर बढ़ा हुआ था। सामग्री विसर्जित करते समय अचानक पैर फिसलने से दोनों गहरे पानी में चले गए। एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में दोनों नदी में डूब गए।
देर रात तक दोनों के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। मंगलवार सुबह सदर कोतवाली पुलिस को उनके लापता होने की सूचना दी गई। इसी दौरान मंगलवार दोपहर करीब दो बजे दुबहर क्षेत्र में जनेश्वर मिश्र सेतु के पास गंगा में एक महिला का शव उतराता मिला। परिजनों ने शव की पहचान इंदु देवी के रूप में की।
पत्नी का शव मिलने के बाद प्रशासन ने ओमप्रकाश दूबे की तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। टीम ने मंगलवार को भी नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह दोबारा अभियान शुरू किया गया और करीब 11 बजे शिवरामपुर के पास से ओमप्रकाश दूबे का शव बरामद कर लिया गया।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के महामंत्री और अध्यक्ष रहे
ओमप्रकाश दूबे कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन बलिया के महामंत्री और अध्यक्ष भी रह चुके थे। अधिवक्ताओं और परिचितों के बीच उनकी सहज और मिलनसार छवि थी। परिजनों के मुताबिक, कोरोना काल में उन्होंने टैगोर नगर की सीमा से लगे आनंद नगर के कोइरी डेरा में अपना घर बनवाया था। इसी घर से उन्होंने अपने बेटे और बेटी दोनों की शादी की थी।
परिजनों और परिचितों का कहना है कि जिस रुद्राभिषेक के बाद सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा सामग्री गंगा में प्रवाहित करने दंपती गया था, उसी दौरान दोनों की जान चली गई। दंपती की असामयिक मौत से परिवार के साथ-साथ अधिवक्ता समाज और क्षेत्र में शोक की लहर है।

