
मगई नदी पर बने पुल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी, रोजाना आठ हजार से अधिक लोगों का होता है आवागमन
बलिया। मानसून की पहली बारिश ने नरहीं गांव में मगई नदी पर बने पुल की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। पुल के रिंग वाल में दरार आ गई है, जबकि दोनों तरफ का एप्रोच मार्ग भी कई स्थानों पर धंसने लगा है। पत्थर के बोल्डर भी खिसक रहे हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
यह पुल बैरिया-थम्हनपुरा-सागरपाली मार्ग को जोड़ता है। इस मार्ग से रोजाना करीब आठ हजार से अधिक लोगों का आवागमन होता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और संभावित बाढ़ के दौरान एप्रोच मार्ग को और नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में पुल पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।

नरहीं गांव निवासी अमरनाथ राय और राकेश राय ने बताया कि मगई नदी पर करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण वर्ष 2021 में शुरू हुआ था। निर्माण कार्य के दौरान ही बाढ़ के पानी से पुल के पास का एप्रोच मार्ग धराशायी हो गया था और रिंग वाल में दरार आ गई थी। इसके बाद इस साल जनवरी में सामने वाले रिंग वाल की दोबारा मरम्मत कराई गई थी।
ग्रामीणों के अनुसार, मानसून की पहली बारिश में ही एप्रोच मार्ग चार स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के दोनों तरफ सड़क धंसने लगी है और पत्थर के बोल्डर भी खिसक रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान ही उन्होंने अनियमितता की शिकायत की थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पुल और एप्रोच मार्ग की तत्काल जांच कराने तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ का पानी बढ़ा तो पुल के एप्रोच मार्ग को और नुकसान हो सकता है, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।

