मुआवजा मिला, जमीन भी गई, 60 साल बाद खतौनी में चढ़ा सिंचाई विभाग का नाम
बलिया। नगरा मौजे में 60 साल पहले हुए भूमि अधिग्रहण में विभागीय लापरवाही अब सामने आई है। सिंचाई विभाग ने वर्ष 1965 में नगरा ड्रेन के निर्माण के लिए करीब 12 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। 100 से अधिक खाताधारकों को इसका मुआवजा भी दे दिया गया था। ड्रेन की खोदाई के बाद किसान इससे सिंचाई भी करने लगे, लेकिन अधिग्रहित भूमि का नामांतरण राजस्व अभिलेखों में नहीं हो सका। इससे खतौनी में छह दशक तक पुराने खातेदारों के नाम ही दर्ज रहे। इसका लाभ उठाकर अधिकांश खाताधारकों ने अधिग्रहित भूमि को भी बेच दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में सिंचाई विभाग के खाते में दर्ज कर दी गई है। इससे जमीन बेचने वाले खाताधारकों और खरीददारों में अफरातफरी मची है।
मौजा नगरा, तहसील रसड़ा से जुड़े इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवशरण यादव बनाम जिलाधिकारी बलिया अवमानना याचिका का 14 सितंबर 2026 को निस्तारण कर दिया। इससे पहले जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान 29 जनवरी 2026 को कोर्ट ने 60 साल तक नामांतरण लंबित रहने को स्वीकार्य नहीं माना था। इसके बाद 17 मार्च 2026 को पीआईएल का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी बलिया को विवादित भूमि की राजस्व प्रविष्टि कानून के अनुसार तीन माह के भीतर अपडेट कराने का निर्देश दिया गया था।
आदेश का अनुपालन न होने पर शिवशरण यादव ने अवमानना याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने 21 अगस्त को सरकार से जवाब मांगा। जिलाधिकारी बलिया ने एसडीएम रसड़ा की 12 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के आधार पर अनुपालन आख्या कोर्ट में प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार 1965 के भूमि अधिग्रहण से संबंधित पुराने अभिलेख सिंचाई विभाग से मंगाए गए थे। विभाग ने पांच सितंबर 2026 को अभिलेख उपलब्ध कराए। चकबंदी के आकार पत्र-41, आकार पत्र-45 और वर्तमान खतौनी से मिलान के बाद 11.756 एकड़ भूमि वर्तमान खतौनी में सिंचाई विभाग ड्रेन के नाम दर्ज कर दी गई।
याची के अधिवक्ता ने राजस्व प्रविष्टि की शुद्धता पर आपत्ति जताई। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही में प्रविष्टि की विस्तृत शुद्धता की जांच आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने अवमानना याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल कर दिया। साथ ही याची को छूट दी कि यदि वह प्रविष्टि को गलत मानता है तो उचित फोरम में उसे चुनौती दे सकता है।
खाताधारकों के नाम हटाकर ड्रेन के नाम हुई प्रविष्टि
उच्च न्यायालय के आदेश और जिलाधिकारी के निर्देश के बाद खाताधारकों के नाम हटाकर खतौनी में सिंचाई विभाग ड्रेन का नाम दर्ज कर दिया गया है। प्रशासन के निर्देश के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
-रामकरण यादव, राजस्व निरीक्षक, नगरा
