
नेताविहीन हो गया बिल्थरारोड विधानसभा
रोशन जायसवाल,
बलिया। एक दौर वह भी था जब बिल्थरारोड में एक से बढ़कर नेता थे जो विकास को लेकर अपनी बातों को प्रमुखता से उठाते थे। वर्ष 2012 में बिल्थरारोड विधानसभा सामान्य सीट से सुरक्षित सीट हो गई। ऐसे में कई नेताओं की बनी बनाई राजनीतिक जमीन ध्वस्त हो गयी। जिसके कारण उन्हें किसी और विधानसभा से तैयारी करनी पड़ी। बिल्थरारोड विधानसभा से चार बार विधायक रहे शारदानंद अंचल जो मुलायम सरकार मे मंत्री भी रहे। उन्होंने बिल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र में कालेजों का जाल बिछा दिया। पूरे जिले में एकमात्र बिल्थरारोड विधानसभा है जहां सबसे ज्यादा स्कूल और कालेज है। इसका सारा श्रेय शारदानंद अंचल को जाता है।
विकास की जब चर्चा होती है तो सबसे पहले बिल्थरारोड तहसील, ट्रेजरी, रोडवेज का नाम आता है जिसका श्रेय शारदानंद अंचल को जाता है। उनका एक सपना था कि बिल्थरारोड जिला बनें, उसके पीछे तर्क यह था कि बिल्थरारोड से देवरिया की दूरी करीब 60 किमी है और लगभग बलिया की दूरी भी 60 किमी है और मऊ की दूरी भी लगभग 60 किलोमीटर है। ऐसे में बिल्थरारोड को जिला बनाने की कवायद लंबे समय तक चली लेकिन शारदानंद अंचल के निधन के बाद काम रूक गया।
बिल्थरारोडवासी आज भी शारदानंद अंचल को याद करते है। वैसे उनके बाद तो कई विधायक हुए लेकिन शारदानंद अंचल के बताये रास्ते पर कोई नहीं चल सका। चर्चा ये होती है कि मौजूदा सुभासपा विधायक हंसू राम से क्षेत्र की जनता खुश नहीं है वजह यह है कि हंसू राम किसी अन्य जिले में निवास करते हैे और कभी कभार क्षेत्र में दिखते है और विकास के नाम पर कुछ ऐसा उन्होंने काम नहीं किया कि जिससे लोग उन्हें याद करें। अब देखना यह होगा कि 2027 के चुनाव में बिल्थरारोड के वासी किसे अपना नेता चुनते है।

