
बलिया। अमेरिका-ईरान युद्ध के असर का प्रभाव अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। जिले में रसोई गैस की किल्लत होने लगी है, जिससे अधिकतर घरों के गैस सिलिंडर खाली हो चुके हैं। गैस की ऑनलाइन बुकिंग भी नहीं हो पा रही है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ विद्यालयों की व्यवस्थाएं भी प्रभावित होने लगी हैं।
गैस की कमी का असर परिषदीय व अन्य विद्यालयों में बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन पर भी पड़ता दिख रहा है। जिले के प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूलों में सरकार की महत्त्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना के तहत छात्र-छात्राओं को विद्यालय में ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। इससे रोज करीब डेढ़ लाख बच्चों का पेट भरता है।
भोजन पकाने के लिए अधिकांश विद्यालयों में घरेलू गैस सिलिंडर का उपयोग किया जाता है। लेकिन गैस की किल्लत के कारण अब मध्याह्न भोजन व्यवस्था पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ ही विद्यालयों में कॉमर्शियल सिलिंडर का प्रयोग किया जाता है, जबकि ज्यादातर स्कूल घरेलू गैस पर ही निर्भर हैं।
गौरतलब है कि पहले परिषदीय विद्यालयों में गैस सिलिंडर की व्यवस्था नहीं थी और भोजन लकड़ी के चूल्हों पर बनाया जाता था। बाद में रसोइयों को धुएं से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सरकार ने गैस सिलिंडर से भोजन पकाने की व्यवस्था लागू की थी। अब गैस की कमी से फिर से व्यवस्थाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गईं।

