You can find updated Android installation instructions and app information on BC Game APK India.

Asarfi

Ballia : क्या पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा देश का 100 वां रामसर साईट सुरहा ताल : डॉ. गणेश पाठक

width="500"

बलिया। भारत का 100 वां रामसर साईट घोषित होने पर सुरहा ताल परिक्षेत्र एवं पक्षी विहार अभ्यारण्य का पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की तरफ लगी है सबकी उम्मीदें। क्या पूरी हो पायेगी यह उम्मीद?
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को संतुलित रखने वाला एवं जैविक विविधता से परिपूर्ण सुरहा ताल का उपग्रह से लिया गया खूबसूरत छायाचित्र तथा उसके चतुर्दिक स्थित क्षेत्र का खूबसूरत परिदृश्य। साथ में नीचे बलिया नगर की स्थिति भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। 34 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में फैले सुरहा ताल अपने देश के प्रमुख आर्द्र भूमियों में से एक है, जिसमें पादप जगत एवं जीव जंतु जगत से परिपूर्ण जैव विविधता पाई जाती है।

यही नहीं इस प्राकृतिक ताल में जाड़े के दिनों में विदेशी पक्षियों की भरमार रहती, जिसमें खासतौर से रंग- बिरंगी साइबेरियन पक्षियां अधिक आती हैं, जिनसे सुरहा ताल गुलजार हो जाता है और पर्यटक अनायास ही सुरहा ताल की तरफ खिंचे चले आते हैं। लेकिन अभी तक यहां पर्यटन से संबंधित कोई भी सुविधा प्राप्त नहीं है।


उल्लेखनीय है कि 5 जून, 2026 को पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुरहा ताल को देश का 100 वां एवं उत्तर – प्रदेश का 13 वां रामसर साईट घोषित किया गया, जिससे यह ताल वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना लिया है और अब यहां पर्यटन विकास के अवसर दिखाई देने लगे हैं। वैसे रामसर साईट घोषित होने से पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के प्रयासों से यहां पक्षी विहार अभ्यारण्य भी स्थापित हो चुका है, किंतु इसका समुचित विकास नहीं हो पाया।

सुरहा ताल में उत्पन्न जैव विविधता के संकट को देखते हुए इस क्षेत्र को पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र ( इको सेंसेटिव जोन) भी घोषित किया जा चुका है, जिसके तहत इसके इर्द – गिर्द स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकता है। अब जब सुरहा ताल रामसर साईट घोषित हो चुका है तो निश्चित ही यह ताल सुरक्षित होगा, इसकी जैव विविधता सुरक्षित एवं संरक्षित होगी, इस क्षेत्र का पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संतुलित रहेगा और पर्यटन की दृष्टि से सुरहा ताल परिक्षेत्र विकसित होकर अपनी वैश्विक पहचान बना सकेगा, जिससे कि बलिया में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे और बलिया की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी किंतु यह सब यों ही नहीं हो पायेगा। इसके लिए शासन, प्रशासन, राजनेता, स्थानीय नागरिकों एवं इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को अथक प्रयास करना होगा, अन्यथा वहीं ढाक के तीन पात होकर रह जायेगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *