
बलिया। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (एआईजेटीएफ) के आह्वान पर जनपद के शिक्षक संगठनों ने टेट अनिवार्यता के विरोध में पत्राचार अभियान शुरू किया। आंदोलन के प्रथम चरण के तहत नौ मार्च से 15 मार्च तक चलने वाले ‘शिक्षक की पाती’ कार्यक्रम में शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष सहित प्रमुख जनप्रतिनिधियों को 1100 पोस्टकार्ड व ईमेल भेजकर विरोध दर्ज कराया।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने बताया कि इस अभियान के तहत जिले से एक लाख से अधिक पोस्टकार्ड, ईमेल और ट्वीट भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यह शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई है और इसे हर स्तर पर मिलकर लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त तथा टेट से छूट प्राप्त शिक्षकों के लिए सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा एक सितंबर 2025 को टेट अनिवार्यता का आदेश जारी किया जाना पूर्व से स्थापित भर्ती नियमों और परंपराओं के विपरीत है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार की चुप्पी के कारण वर्ष 2011 से पहले नियुक्त देशभर के लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के साथ ही विद्यार्थियों के भविष्य पर भी संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से शिक्षक और राष्ट्रहित में इस आदेश को निरस्त कराने के लिए पहल करने की मांग की।
अभियान के दौरान ये रहे उपस्थित
इस दौरान महासंघ के संयोजक अजय सिंह, समीर कुमार पांडेय, सतीश सिंह, घनश्याम चौबे, राजेश सिंह, राकेश कुमार मौर्य, विनय राय, राधेश्याम पांडेय, अभिषेक राय, संजीव कुमार सिंह, संजय पांडेय, मलय पांडेय, मुकेश सिंह, नारायण, रजनीश चौबे, अनिल सिंह, हरेराम सिंह, डॉ. आशुतोष शुक्ला, सुरेश वर्मा, नंदलाल मौर्य, राकेश कुमार सिंह, नित्यानंद पांडेय, राजीव नयन पांडेय, रवींद्र तिवारी, विवेक सिंह, सिद्धार्थ सिंह, रमेश तिवारी, उपेंद्र नारायण सिंह, संदीप सिंह, जितेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।

