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Ballia : गोविष्ट यात्रा में बोले शंकराचार्य, गौ रक्षा से ही बचेगा सनातन धर्म

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कृष्णा कांत पाठक कान्हजी,
लालगंज (बलिया)।
क्षेत्र के मुरारपट्टी मठिया पर गुरुवार को प्रदेशव्यापी गोविष्ट यात्रा के तहत ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती दर्जनों साधु-संतों के साथ पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका स्वागत, पूजन-अर्चन और आरती की। बाद में माला और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गाय के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि पूजा-पाठ में घी, दूध, दही, गोमूत्र और गोबर का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के सात स्तंभ हैं, जिनमें पहला स्तंभ गौ है। यदि गौ समाप्त हो जाएगी तो सनातन धर्म का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।


उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने की बातें तो की जाती हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और गौ संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। आरोप लगाया कि देश में बूचड़खानों को लाइसेंस और सब्सिडी देकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने गाय को पशुओं की सूची में रखा था, लेकिन आज तक उसे उस श्रेणी से बाहर नहीं निकाला गया।


शंकराचार्य ने कहा कि जिस गाय को भारत में माता का दर्जा दिया जाता है, वही आज अपने देश में सुरक्षित नहीं है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को गौ रक्षा की शपथ दिलाई और कहा कि जो नेता गौ रक्षा का संकल्प ले, उसी का समर्थन किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने लोगों से संवाद भी किया।
कार्यक्रम में जय नारायण तिवारी, पुरुषोत्तम तिवारी, मिथिलेश दुबे, सुजीत दुबे, गोल्डेन ओझा, अजीत तिवारी, मुरलीधर दुबे, गुप्तेश्वर तिवारी, उपेंद्र पाठक, सुजीत तिवारी, धर्मबीर उपाध्याय, मुन्ना राम समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

किसी सरकार के समर्थक और विरोधी होने से किया इंकार
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य इस देश में गायों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और गाय को राष्ट्र माता घोषित करना है। वे किसी सरकार के समर्थक या विरोधी नहीं हैं, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति भी उनका कोई विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को गायों की हत्या रोकने और गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह दुखद है कि वे नौ वर्षों से सत्ता में हैं, लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया है।

यात्रा का समापन 24 जुलाई को होगा लखनऊ में
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का समापन आगामी 24 जुलाई को लखनऊ में होगा। उन्होंने यहां के लोगों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुंचकर इस कार्यक्रम में भाग लें।

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