
बलिया। शेरे बलिया के नाम से प्रसिद्ध चित्तू पांडेय के गांव रट्टूचक (सागरपाली) में तेल और गैस मिलने की संभावना को लेकर चल रही खोदाई का कार्य पूरा कर लिया गया है। जमीन की सतह से करीब तीन हजार मीटर नीचे से निकाले गए सैंपल को जांच के लिए देहरादून भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज में जुटी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) की टीम ने रट्टूचक में ड्रिलिंग का चरण पूरा किया है। प्लांट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
कंपनी अब चार किलोमीटर दूर बनरही गांव में अजय सिंह के खेत को लीज पर लेकर दूसरी साइट तैयार कर रही है। यहां भी करीब तीन हजार मीटर गहराई तक ड्रिलिंग की जाएगी। जिले के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण का कार्य जारी है।
बताया जाता है कि ओएनजीसी की विशेष टीम देशभर में सैसमिक सर्वेक्षण कर रही है। करीब आठ वर्ष पूर्व उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा तटवर्ती इलाकों में भी सैसमिक सर्वे किया गया था, जिसके आधार पर बलिया क्षेत्र को संभावित स्थल के रूप में चिन्हित किया गया।
सामाजिक कार्य भी कर रही है कंपनी
तेल की खोज के साथ-साथ कंपनी सामाजिक दायित्व भी निभा रही है। सीआरएस फंड के तहत क्षेत्र के सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर सोलर लाइटें लगाई जा रही हैं। आरूही संस्थान के माध्यम से कई विद्यालयों को गोद लेकर कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है तथा सार्वजनिक स्थानों व अस्पतालों में वाटर कूलर लगाए गए हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि तेल या गैस का भंडार मिलता है तो क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और विकास को नई दिशा मिलेगी। फिलहाल सभी की नजरें देहरादून से आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

