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Ballia : राष्ट्रवाद और संघर्ष के प्रतीक थे चित्तू पांडेय : बोले उमाशंकर पाठक

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शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय की जयंती पर लोगों ने किया नमन
बलिया।
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं बलिया के प्रथम कलेक्टर, 1942 की आजादी की लड़ाई के अग्रदूत शेर-ए-बलिया स्वर्गीय चित्तु पांडेय की 131वीं जयंती रविवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्रों एवं युवाओं ने पहुंचकर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने कहा कि चित्तु पांडेय ने केवल बलिया को आजाद नहीं कराया, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि 19 अगस्त 1942 को बलिया का आजाद होना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय है।


वहीं धनंजय सिंह बिसेन एवं जिला पंचायत सदस्य मिंटू खान ने कहा कि चित्तु पांडेय आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनके राजनीतिक संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और विचारों से नई पीढ़ी को सीख लेने की आवश्यकता है।
शिक्षक नेता करुणानिधि तिवारी ने कहा कि चित्तु पांडेय ने अपने संघर्षों के बल पर बागी बलिया को स्वतंत्र कराकर राष्ट्रवाद की मजबूत नींव रखी। उनके योगदान के कारण आज बलिया का नाम देश ही नहीं बल्कि दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है।

कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
इस अवसर पर निर्मल उपाध्याय, ओमप्रकाश तिवारी, भूपेंद्र पांडेय, सुशील पांडेय, विनय पांडेय, प्रो. संतोष गुप्ता, आशीष द्विवेदी, शंभूनाथ तिवारी, संतोष चौबे, अनिल पांडेय, गोपाल पांडेय, विवेक पांडेय, सागर सिंह, राहुल, राशिद जमाल, धीरेंद्र ओझा, सत्यप्रकाश उपाध्याय, वंशरोपण पांडेय, प्रवीण सिंह, सुशांत राज भारत, विवेक ओझा, आशीष सिंह, शाहिद अली, आशुतोष पांडेय, जुनेद आलम, संतोष सिंह, बृजेश प्रसाद, मुखिया पांडेय, रमाशंकर तिवारी, प्रशांत पांडेय, नील पांडेय, रजत पांडेय, अभिषेक कुमार, चिराग उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जैनेंद्र पांडेय ‘मिंटू’ ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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