1996 में बच्चा पाठक ने पीएन तिवारी को 793 वोट से हराया था
रोशन जायसवाल,
बलिया। बांसडीह विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरा बच्चा पाठक को मैदान में उतारा तो भाजपा ने भी उनके सामने ब्राह्मण प्रत्याशी पीएन तिवारी को टिकट दिया था। मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन कांग्रेस के बच्चा पाठक ने 793 वोट से जीत दर्ज की।
1996 का चुनाव परिणाम
बच्चा पाठक (कांग्रेस), 42,242 वोट
पीएन तिवारी (भाजपा), 41,449 वोट
जीत का अंतर, 793 वोट
बांसडीह की राजनीति में बच्चा पाठक के बाद कोई दूसरा ब्राह्मण प्रत्याशी विधानसभा चुनाव जीत दर्ज नहीं कर सका। बच्चा पाठक ने इसके बाद 2002 और 2007 में भी चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2007 में कांग्रेस के बच्चा पाठक के सामने भाजपा ने डॉ. डीके शुक्ला को मैदान में उतारा था। भाजपा का यह प्रयोग भी सफल नहीं हुआ। यानी बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अब तक दो प्रमुख मौकों पर ब्राह्मण प्रत्याशियों को मैदान में उतार चुकी है, 1996 में पीएन तिवारी और 2007 में डॉ. डीके शुक्ला। हालांकि दोनों चुनावों में भाजपा को सफलता नहीं मिली।
2014 के बाद भाजपा के जनाधार में हुआ व्यापक विस्तार
उस दौर और आज की राजनीतिक परिस्थितियों में भी बड़ा अंतर है। 1996 और 2007 के समय भाजपा का प्रभाव आज की तुलना में सीमित था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के जनाधार में व्यापक विस्तार हुआ, जिसका असर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी देखने को मिला। अब बांसडीह क्षेत्र में भाजपा का संगठन और चुनावी आधार पहले की तुलना में काफी मजबूत माना जाता है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी किस सामाजिक समीकरण और किस चेहरे के साथ मैदान में उतरती है, यह बांसडीह की राजनीति में अहम सवाल बना हुआ है।
