
बलिया के बांसडीह में रविवार को एक युवक पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। धनजी वर्मा नामक यह युवक लगभग 13 घंटे तक 150 फीट ऊंचे टावर पर रहा। उसने सुबह 3 बजे टावर पर चढ़ाई की और शाम 3ः45 बजे सुरक्षित नीचे उतरा। टावर पर चढ़ने के बाद धनजी ने झोले से बैनर और दर्जनों पर्चियां नीचे फेंकीं। इन पर्चियों में लिखा था कि उसका विरोध पुलिस विभाग से नहीं, बल्कि शिकायतों को दबाने और निष्पक्ष जांच न करने वाली कार्यप्रणाली से है।
धनजी का आरोप है कि उसकी पत्नी ने कानूनी तलाक प्रक्रिया पूरी किए बिना दूसरा विवाह कर लिया है, जिस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसने यह भी बताया कि दो माह पहले दर्ज हुए एक मुकदमे में भी अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं और विरोध करने पर उसे ही झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है। युवक ने अपने परिजनों और पड़ोसियों पर भी अपनी कमाई, पुश्तैनी जायदाद और भोजन से बेदखल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
घटना की सूचना मिलने पर बांसडीह कोतवाल राकेश सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने फोन पर कई बार धनजी से बात कर उसे नीचे उतारने का प्रयास किया, लेकिन वह सीओ और एसडीएम द्वारा तैयार पुरानी रिपोर्टों की उच्चस्तरीय जांच की शर्त पर अड़ा रहा।
बांसडीह चेयरमैन के आश्वासन पर नीचे उतरा धनजी
स्थिति बिगड़ती देख शाम करीब 3 बजे कोतवाल ने बांसडीह चेयरमैन सुनील सिंह से हस्तक्षेप का अनुरोध किया। चेयरमैन सुनील सिंह ने मौके पर पहुंचकर धनजी से फोन पर लंबी बातचीत की। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया और पत्रकारों से उसकी बात कराकर मीडिया कवरेज व न्याय का भरोसा दिलाया। लगभग 14 घंटे के गतिरोध के बाद, शाम 3ः45 बजे युवक टावर से सुरक्षित नीचे उतर आया। इसके बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली।
टावर पर चढ़कर दबाव बनाना बेहद खतरनाक
स्थानीय लोगों का कहना है कि अपनी बात रखने या किसी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन और पुलिस के पास जाने के बजाय टावर पर चढ़कर दबाव बनाना बेहद खतरनाक तरीका है। इससे संबंधित व्यक्ति की जान तो जोखिम में पड़ती ही है, साथ ही मौके पर जुटने वाले बच्चों और युवाओं के बीच भी गलत संदेश जाता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
पहली घटना के बाद यदि टावर पर चढ़ने जैसे कदमों को लेकर सख्त संदेश दिया जाता तो शायद दोबारा ऐसी स्थिति नहीं बनती। आज की घटना को चेतावनी मानते हुए प्रशासन को ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था करनी होगी, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी मांग मनवाने के लिए जान जोखिम में डालकर दबाव बनाने का प्रयास न करे।

