
बलिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के नितेश कुमार और एक अन्य के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने 13 अगस्त 2026 को पारित आदेश में केस संख्या 2326/2026, राज्य बनाम नितेश कुमार एवं अन्य से संबंधित पूरी कार्यवाही, आरोप पत्र तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बलिया द्वारा 23 फरवरी 2026 को पारित संज्ञान एवं समन आदेश को आवेदकों के संबंध में निरस्त कर दिया।
प्रयागराज में एक हिंदी अखबार में प्रकाशित समाचार के अनुसार यह मामला 31 जनवरी 2025 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा था। आरोप था कि 27 जनवरी 2025 को दीप ट्रेडिंग कंपनी पर हुई छापेमारी के बाद 29 जनवरी को आवेदक दूसरे पक्ष के घर पहुंचे, जहां कथित रूप से गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की गई। पुलिस जांच के बाद 24 जून 2025 को नितेश कुमार और एक अन्य के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
आवेदकों की ओर से अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। यह भी दलील दी गई कि संबंधित अधिकारी ने आवेदकों को अपने निजी आवास पर बुलाया था, इसलिए कथित घटना को सरकारी कार्य के दौरान हुई घटना नहीं माना जा सकता।
अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आरोप प्रथम दृष्टया पर्याप्त नहीं हैं और रिकॉर्ड पर ऐसा ठोस आधार नहीं है, जिससे आवेदकों के विरुद्ध अभियोजन चलाना उचित हो। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के भजन लाल मामले में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने के लिए न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति के प्रयोग को उचित माना।
व्यापारी नेता ने बताया सच्चाई की जीत
भाजपा के जिला महामंत्री एवं व्यापारी नेता संजीव कुमार डंपू ने हाईकोर्ट के फैसले को संघर्ष और सच्चाई की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भ्रष्टाचार और कानून के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ने वाले व्यापारियों का मनोबल बढ़ाएगा और हजारों व्यापारियों के लिए नजीर का काम करेगा। उन्होंने अधिवक्ता अपूर्व हजेला की प्रभावी पैरवी की भी सराहना की।

