You can find updated Android installation instructions and app information on BC Game APK India.

Asarfi

Ballia : राजनीति में कुछ भी संभव : बसपा को कमजोर समझना पड़ सकता है भारी

width="500"

रोशन जायसवाल,
राजनीति में कुछ भी संभव है। जिस बसपा को आज कमजोर समझा जा रहा है, वह आने वाले विधानसभा चुनाव में अचानक मजबूत स्थिति में नजर आए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा लगातार अपना सोशल इंजीनियरिंग मजबूत करने में जुटी है और यदि यही रफ्तार बनी रही तो चुनावी तस्वीर में वह समाजवादी पार्टी से आगे निकलती दिखाई दे सकती है।

पूरे प्रदेश में बसपा शासन की चर्चा आज भी मुख्य रूप से दो मुद्दों को लेकर होती है, कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर नकेल। वर्ष 2007 से 2012 के बीच मायावती सरकार के कार्यकाल को लेकर समर्थक अक्सर यह उदाहरण देते हैं कि अधिकारियों में किस तरह की प्रशासनिक हनक थी और जनता की शिकायतों को सुनने को लेकर सरकार की सख्ती कैसी थी।
यही दो मुद्दे आज भी बसपा की राजनीतिक पूंजी माने जाते हैं। इसके साथ ही पार्टी का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला नए सिरे से मजबूत होता दिख रहा है। अलग-अलग सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिशों ने राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज कर दी है।

राजनीतिक गलियारों में हो रही इसकी जबरदस्त चर्चा
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा है कि यदि सीट शेयरिंग को लेकर ओमप्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद एनडीए से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए तो क्या भविष्य में उनका रुख बसपा की ओर हो सकता है? यहां तक चर्चा है कि रविवार को दोनों नेताओं के बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने की संभावना को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, इस तरह की किसी मुलाकात या राजनीतिक समीकरण की अभी कोई पुष्टि नहीं है। यह फिलहाल राजनीतिेक चर्चा और अटकलों तक सीमित है। लेकिन इतना जरूर है कि 2027 की लड़ाई को लेकर बसपा को नजरअंदाज करना शायद विपक्षी दलों के लिए आसान नहीं होगा। बसपा कितनी मजबूत होगी और चुनाव में उसका वास्तविक असर कितना दिखाई देगा, इसका फैसला आने वाला वक्त करेगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *