
प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों में होती थी उमाशंकर सिंह की गिनती
बलिया। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन की के बाद पूरे बलिया जिले में शोक की लहर दौड़ गई। उमाशंकर सिंह बलिया जिले के नगरा ब्लाक के खनवर गांव के निवासी थे। वह लगातार तीन बार रसड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे और क्षेत्र के प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों में उनकी गिनती होती थी। लंबे समय से वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनका उपचार चल रहा था।
निधन की सूचना की पुष्टि के बाद उनके आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। रसड़ा, नगरा सहित पूरे बलिया जिले में उनके समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। विधायक के निधन पर सीएम योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, भाजपा सांसद नीरज शेखर, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विस अध्यक्ष सतीश महाना, भूपेंद्र चौधरी, रवि किशन, ब्रजभूषण शरण ंिसह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।

सेवानिवृत्त सैनिक घुरहू सिंह के पुत्र थे उमाशंकर
उमाशंकर सिंह सेवानिवृत सैनिक घुरहू सिंह के पु़त्र थे। उमाशंकर सिंह स्नातक तक शिक्षित हैं। उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफरनामा छात्र संघ से शुरू हुआ और वे सतीश चंद्र महाविद्यालय बलिया से छात्रसंघ के महामंत्री बने। तत्पश्चात 2002-2003 में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 में पहली बार से सक्रिय राजनीति में आए और बसपा की टिकट से चुनाव लड़े और लगभग 84 हजार से अधिक मत प्राप्त कर विजेता बने।

उसके बाद 2017 के चुनाव में उमाशंकर सिंह ने लगभग 92272 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह को 33885 मतों से हराकर दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2022 में उन्होंने सपा-सुभासपा के सशक्त गठबंधन के बावजूद सुभासपा के प्रत्याशी महेंद्र चौहान को कड़े मुकाबले में 5 हजार से अधिक मतों से शिकस्त देकर तीसरी बार विधायक निर्वाचित घोषित किए गए।

600 से अधिक निर्धन कन्याओं का करा चुके है शादी
विधायक उमाशंकर सिंह वर्ष 2012 से पूर्व छात्र शक्ति इंन्फ्रा कांट्रकशन संस्थान से सड़क निर्माण का कार्य करते रहे। विधायक बनने के बाद उन्होंने सड़क ठेका का कार्य उनके अनूज रमेश सिंह, पत्नी पुष्पा सिंह तथा बेटा युकेश सिंह करते चले आ रहे हैं। विधायक उमाशंकर सिंह प्रमुख समाजसेवी के रूप में विख्यात रहे और अपने युवा अवस्था में 600 से अधिक निर्धन कन्याओं का सामूहिक शादी कराकर ख्याति प्राप्त की।

