
2027 विधानसभा चुनाव: बड़े दलों के दावेदारों की नजर अब बसपा पर भी, संगठन जुटा रहा फीडबैक
रोशन जायसवाल,
बलिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बलिया जिले की सातों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल, सुभासपा और अन्य दलों से टिकट की दावेदारी करने वाले संभावित उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी कई दावेदारों के लिए एक अहम राजनीतिक विकल्प बनकर उभर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों पर बसपा का अपना एक निश्चित जनाधार और वोट बैंक मौजूद है। यही कारण है कि कई ऐसे नेता, जो फिलहाल दूसरे दलों से टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं, समानांतर रूप से बसपा नेतृत्व से भी संपर्क बनाए हुए हैं। उनकी रणनीति यह है कि यदि प्रमुख दलों से टिकट नहीं मिलता है तो बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने का विकल्प खुला रहे।
संभावित उम्मीदवारों का फीडबैक जुटा रही बसपा
सूत्रों के अनुसार बसपा संगठन भी इस बार पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। पार्टी पदाधिकारी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों का फीडबैक जुटा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संगठन उन नेताओं की राजनीतिक सक्रियता, जनाधार, सामाजिक समीकरण और चुनाव लड़ने की क्षमता का आकलन कर रहा है। इसके आधार पर संभावित दावेदारों की सूची तैयार किए जाने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा इस बार टिकट वितरण में स्थानीय समीकरणों और जीत की संभावना को प्राथमिकता दे सकती है। ऐसे में अन्य दलों से टिकट नहीं पाने वाले कई प्रभावशाली चेहरे बसपा के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि कई दावेदार अभी से पार्टी के नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल एक सीट पर मिली थी जीत
हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा था। पार्टी प्रदेश में केवल एक सीट जीत सकी थी। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी बसपा अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। लगातार कमजोर चुनावी नतीजों के चलते पार्टी के सामने अपने पारंपरिक जनाधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। इसी चुनौती को देखते हुए बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। संगठन विस्तार, बूथ स्तर की मजबूती, सामाजिक समीकरणों को साधने और प्रभावशाली स्थानीय चेहरों को साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि बदले हुए राजनीतिक माहौल में नए उम्मीदवारों और नई चुनावी रणनीति के सहारे अपनी राजनीतिक मौजूदगी को फिर से मजबूत किया जाए।

