
पुलिस ने कहा, आरोप निराधार, जांच को तैयार
बलिया। रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव निवासी 50 वर्षीय काम जी गौड़ की वाराणसी ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस की पिटाई के कारण उनकी मौत हुई, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पूछताछ के बाद उन्हें सकुशल परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर मामले की नियमानुसार जांच कराई जाएगी।
जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई को गायघाट के खेदन चौराहे पर काम जी गौड़ के पुत्र विशाल और गांव के सूरज के बीच किसी बात को लेकर विवाद और मारपीट हुई थी। इस मामले में सूरज की ओर से रेवती थाने में तहरीर दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि जब विशाल पूछताछ के लिए थाने नहीं पहुंचा तो 8 जुलाई को पुलिस उसके घर पहुंची और उसे न मिलने पर उसके पिता काम जी गौड़ को पूछताछ के लिए थाने ले गई।
परिजनों का आरोप है कि थाने में काम जी गौड़ के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। बाद में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल और फिर गंभीर हालत में वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृतक के भाई रमाशंकर तथा परिजन कलावती देवी ने आरोप लगाया कि काम जी गौड़ का बेटे के विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। उनका कहना है कि पुलिस उन्हें घर से ले गई, थाने में मारपीट की और बाद में गांव के पास छोड़ दिया। परिजनों के मुताबिक उनके शरीर पर चोट के निशान थे और उन्होंने स्वयं पुलिस द्वारा पिटाई किए जाने की बात बताई थी।
क्षेत्राधिकारी बैरिया का वर्जन…
वहीं, क्षेत्राधिकारी बैरिया आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि 7 जुलाई को दो पक्षों के बीच हुए विवाद की शिकायत पर 8 जुलाई को पुलिस पूछताछ के लिए गांव गई थी। काम जी गौड़ को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था और पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें गांव के ही मनीष यादव के साथ सकुशल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि इसकी सीसीटीवी फुटेज और सुपुर्दगी का फोटो-वीडियो उपलब्ध है।
सीओ ने बताया कि 10 जुलाई को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान काम जी गौड़ की मृत्यु हुई। यदि परिजन इस संबंध में कोई प्रार्थना पत्र देते हैं तो मामले की नियमानुसार जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

