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Ballia : जिला अस्पताल विवाद : सीएमओ बोले, मृतक को चार डॉक्टरों ने देखा, आरोप निराधार

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ट्रॉमा सेंटर में लाने से पहले ही हो चुकी थी मौत, सीसीटीवी फुटेज से हुई पुष्टि
बलिया।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया है कि प्रातः 25 जून को ट्रॉमा सेंटर, जिला चिकित्सालय बलिया में अविनाश कमार
पत्र स्वर्गीय राज किशोर को लाया गया था, जहां ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सक डॉ मनोज कुमार द्वारा उन्हें मुत पाया गया। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार मृतक अविनाश कुमार पुत्र स्व. राज किशोर को 8ः09 पर जिला चिकित्सालय परिसर के गेट से ई- रिक्शा द्वारा ले जाने की पुष्टिहोती है। 8ः16 पर इमरजेंसी में ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्साअधिकारी डॉ संतोष कुमार सिंह मृतक के साथ आए किसी व्यक्ति के द्वारा बुलाए जाने पर इमरजेंसी से ट्रॉमा सेटर की तरफ जाते दिखाई दे रहे हैं। डॉ. संतोष कुमार सिंह ने अपने लिखित बयान में कहा कि वह ट्रामा सेंटर जाकर अविनाश कुमार को देखे थे एवं उनके मृत होने की पुष्टि करते हुए ट्रॉमा सेंटर पर ड्यूटी पर कार्यरत डॉ० मनोज कुमार को अग्रिम कार्यवाही हेतु समझाकर चले गए थे।

डॉ मनोज कुमार के लिखित बयान
डॉ मनोज कुमार के लिखित बयान के अनुसार वह रात से डु्यूटी कर रहे थे, उस समय तक उनके रिलीवर डॉ. रजनीश आ चुके थे। दोनों चिकित्सकों ने मरीज को देखा था, इसी बीच ऑन कॉल कंसलटेंट सर्जन डॉ. अनिल सिंह ने भी आकर मरीज को देखा, कुछ ही देर बाद डॉक्टर संतोष भी आ गए थे। डॉ मनोज कमार ने अपने लिखित बयान में कहा है कि वह सुबह लगभग 8ः30 बजे
तक ट्रॉमा सैंटर में ही कार्यरत थे जिसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई। सीसीटीवी में पाया गया कि वे प्रातः 8ः30 पर इमरजेंसी से होते हुए बाहर की तरफ जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। डॉ मनोज कुमार ने अपने बयान में यह भी लिखा है कि ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़ शुरू हो गई थी जिसमें उन्हें चोट भी आई है।

परिजनों का यह है आरोप
परिजनों का आरोप है कि अविनाश कुमार पुत्र स्वर्गीय राजकिशोर को पहले इमरजेंसी में लाया गया था जहां चिकित्सक ने बिना उन्हें देखे ट्रॉमा सेंटर में ले जाने के लिए कहा। सीसीटीवी फुटेज में उपरोक्त के इमरजेंसी में आने की पुष्टि नहीं हो रही है। साथ ही मरीज के परिजनों द्वारा लगाया गया आरोप पूर्णतया निराधार है कि घायल मरीज को किसी भी चिकित्सक द्वारा देखा नहीं गया। वस्तुत उपरोतक्त मरीज को जिला चिकित्सालय में तत्सम ड्यूटी पर तैनात 4 चिकित्सकों द्वारा देखा गया था । चिकित्सकों के ड्यूटी पर न होने का आरोप पूर्णतया निराधार है।

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