
रोशन जायसवाल,
बलिया। नौ अक्टूबर 2006 के दिन को बलियावासी कभी नहीं भूल सकते, क्योंकि ये दिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अंतिम यात्रा का दिन था। 11 अक्टूबर 2006 को जयप्रकाश नारायण जयंती समारोह था। उसमें शामिल होने के लिए 10 अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर स्वतंत्रता सेनानी से जाने के लिए बलिया रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उस समय रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर लोगों से मिले। उसके बाद वे वहां से ट्रेन से सफर करते हुए बकुल्हा रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से जयप्रकाश नगर कार द्वारा पहुंचे।
रात्रि विश्राम करने के बाद 11 अक्टूबर को जयंती मनाकर वह दिन में करीब दो बजे सहतवार के लिए प्रस्थान किए। फिर वहां से कार्यक्रम सफल होने के बाद चंद्रशेखर नगर स्थित झोपड़ी आ गए। यहां अंतिम बार 11 अक्टूबर को झोपड़ी पर निवास करने के बाद अगले दिन 12 अक्टूबर को दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए। फिर इसके बाद वे बलिया में आए तो नहीं लेकिन उनका अस्थि कलश लेकर उनके पुत्र पंकज शेखर और नीरज शेखर लेकर बलिया आएं और जयप्रकाश नगर में गंगा में अस्थि कलश विसर्जित किया।
अंतिम बार चंद्रशेखर तो पहली बार नीरज शेखर बने थे सांसद
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 2004 में अंतिम बार बलिया लोकसभा सीट से सजपा प्रत्याशी के रूप में चंद्रशेखर ने नामांकन पत्र दाखिल किया। चुनाव के करीब दो साल बाद 2006 में उनका निधन हो गया। इनके राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नीरज शेखर 2007 में सपा के टिकट से लोकसभा चुनाव और पहली बार सांसद बने।
चंद्रशेखर का सपना नहीं हुआ पूरा
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का ड्रीम प्रोजेक्ट बसंतपुर में शहीद स्मारक बनाने का सपना अधूरा ही रह गया। उनके निधन के बाद सपना पूरा नहीं हो पाया। आज उसी जगह पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। बसंतपुर में चंद्रशेखर जी ने जो संग्रहालय बनाया था, उस संग्रहालय में यूनिवर्सिटी संचालित हो रही है। जबकि यह आम लोगों के लिए नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी से जुड़े शिक्षक व छात्रों के लिए रह गया।
जयप्रकाश नगर से था अटूट प्रेम
जब-जब दिल्ली से चंद्रशेखर बलिया आए तब-तब जयप्रकाश नगर जाते रहे। चंद्रशेखर जी का जयप्रकाश नगर से काफी लगाव था। 11 अक्टूबर 2001 में जेपी शताब्दी समारोह मनाया गया। जिसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री, उप राष्ट्रपति कृष्णकांत, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, नीतिश कुमार समेत बड़े नेताओं का जमघट हुआ था। इसकी अगुवाई स्वयं चंद्रशेखर जी कर रहे थे। उनके निधन के बाद यही जगह सूना हो गया।

