
अखिलेश और पीके की सीक्रेट मीटिंग की हो रही चर्चा
रोशन जायसवाल,
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक साल का समय है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की आईपैक टीम आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के साथ काम कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर के बीच दिल्ली और पश्चिम बंगाल में कुछ अहम मुलाकातें भी हुई हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर है कि सपा ने चुनावी रणनीति के लिए इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर सकती है। इसकी कितनी पुष्टि है यह बताना जल्दबाजी होगा। बहरहाल जो भी हो अंदरखाने कुछ न कुछ जरूर है, जो बाहर निकलकर नहीं आ पा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से सलाह लेने के बाद अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए आई-पैक के साथ रणनीतिक समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बताया जा रहा है कि आई-पैक ने सपा के सामने चुनावी रणनीति का प्रारूप भी पेश किया है और जल्द ही आई-पैक की टीम लखनऊ में सक्रिय हो सकती है।
यूपी की राजनीति में पहले भी सक्रिय रह चुकी है आई-पैक
चर्चा यह भी है कि समाजवादी पार्टी ने आई-पैक की टीम को खास तौर पर उन विधानसभा सीटों पर फोकस करने के लिए कहा है, जहां पिछले चुनाव में सपा बहुत कम अंतर से हार गई थी।
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर की टीम पहले भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रह चुकी है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के कैंपेन मैनेजमेंट में उसकी अहम भूमिका मानी जाती है। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ भी आई-पैक ने काम किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हालांकि बाद में प्रशांत किशोर ने सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए बिहार में ‘जनसुराज’ अभियान शुरू किया और आई-पैक से कुछ दूरी बना ली। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर सपा और आई-पैक के बीच समझौता होता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा को टक्कर देने के लिए अखिलेश यादव की रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है।

