
अपने आवास पूर में पूर्वांचल विकास मंच के संयोजक ने की प्रेसवार्ता
रोशन जायसवाल,
बलिया। पूर्वांचल विकास मंच के संयोजक कृष्णकांत उपाध्याय उर्फ कप्तान बाबा ने अपने आवास पूर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पूर्वांचल राज्य बनाने का अभियान विगत 35 सालों से चल रही है। इसकी शुरूआत मार्च 1991 में पूर गांव से हुई थी। पूर्वांचल राज्य बनाने को लेकर बलिया के बाद दूसरी बैठक वाराणसी में हुई थी। इसमें पूर्वांचल के लोग शामिल थे। उसके बाद 2010 में मुख्यमंत्री मायावती के पास पूर्वांचल राज्य को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था।

उस दौरान मुख्यमंत्री मायावती को पत्रक भी सौंपा गया था। उसके चर्चा यही हुई थी कि उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है और पूर्वांचल विकास के मामले में बहुत पीछे है। इसलिये पूर्वांचल राज्य बहुत ही जरूरी है। कप्तान उपाध्याय ने बताया कि उस दौरान मुख्यमंत्री मायावती ने पूर्वांचल राज्य बनाने के लिये काफी गंभीर हुई थीं। दो साल तक प्रक्रिया भी चली लेकिन मायावती की सरकार चली गई।
उसके बाद उप्र में सपा सरकार बनी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। लेकिन अखिलेश यादव पूर्वांचल राज्य बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उन्हें सबसे बड़े राज्य का सीएम बने रहना था। इसलिये वो पूर्वांचल राज्य की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उसके पीछे सोच यह थी कि पूर्वांचल में सपा का वर्चस्व है। अगर पूर्वांचल कट जाएगा तो सपा सत्ता में नहीं आएगी।
कप्तान उपाध्याय ने कहा कि उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पांच वर्ष सरकार रही लेकिन मामला ठंडे बस्ते में रहा। इधर पूर्वांचल राज्य बनाने का अभियान तेज हुआ है। अब पूर्वांचलवासियों को संभावना बना हुआ है कि पीएम और सीएम पूर्वांचल राज्य बनाने का सपना साकार करेगे। दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी बना हुआ है कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा होगा जिसमें तीन राज्य बनेगे, उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड व पूर्वांचल। हालांकि खबर इसकी पुष्टि नहीं करती है लेकिन चर्चा जबरदस्त है।

