
रोशन जायसवाल/मयूरी सिंह,
बलिया। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर स्थित पचरूखिया पुरानी बस्ती जहां किसी समय में रतन चौधरी का घर हुआ करता था। इनके पिता दीप नारायण चौधरी एक किसान थे। गंगा में सबकुछ तबाह होने के बाद निराश होकर 1940 मे कलकत्ता चले गए। इसके बाद वहां रेलवे कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिए। कलकत्ता पहुंचने के 16 साल बाद 1956 में रतन चौधरी का जन्म हुआ। आज वहीं रतन चौधरी अपने 70 वर्षीय जीवन में एक बड़े बिल्डर के रूप में अपनी पहचान बना चुके है। वह पहली बार 2018 में अपने गांव पचरूखिया एक कार्यक्रम में आए हुए थे।

उसके बाद उनका आना गांव में नहीं हो पाया। लेकिन आज भी गांव के कुछ प्रमुख लोगों से बातचीत होती है। बुधवार को बलिया आजकल के रिपोर्टर रोशन जायसवाल रतन चौधरी के गांव पचरूखिया पहुंचे हुए थे। जहां उनके बारे मे जानकारी प्राप्त की और दूरभाष से रतन चौधरी से बातचीत में अपने पिता के जन्मभूमि पचरूखिया गांव से लेकर अपनी कर्मभूमि पश्चिम बंगाल तक के सफलता की जानकारी प्राप्त की।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से निकलकर पश्चिम बंगाल में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रतन चौधरी आज एक सशक्त ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उनकी जड़ें आज भी बलिया जनपद की बैरिया विधानसभा क्षेत्र के पचरुखिया गांव से जुड़ी हुई हैं। रतन चौधरी, दीप नारायण चौधरी के पुत्र हैं। वर्ष 1940 में गंगा की बाढ़ और कटान के चलते दीप नारायण चौधरी को मजबूरन कोलकाता जाना पड़ा, जहां उन्होंने रेलवे कंस्ट्रक्शन के कार्य से जीवन की नई शुरुआत की।
इसी संघर्षपूर्ण माहौल में वर्ष 1956 में जन्मे रतन चौधरी ने कठिन परिश्रम और लगन के बल पर पश्चिम बंगाल में एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई। आज वे पंचदीप कंस्ट्रक्शन के प्रमुख हैं और हावड़ा में बनने जा रहे भव्य ‘पंचदीप टॉवर’ के जरिए इतिहास रचने जा रहे हैं।
करीब 400 फीट ऊंचा पंचदीप टॉवर दिल्ली के कुतुब मीनार और कोलकाता के शहीद मीनार से भी ऊंचा होगा। यह देश का सबसे ऊंचा ऑब्जर्वेटरी टॉवर होगा, जिसके शीर्ष पर लग्जरी होटल भी प्रस्तावित है। रतन चौधरी का कहना है कि यह टॉवर मई माह में शुरू हो जाएगा। बताया कि यह आम लोगों के लिए भी सुलभ होगा। गांव से शहर तक की यह प्रेरक यात्रा आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन रही है।

