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Ballia : तहसीलदार के उदासीनता से अतिक्रमणमुक्त नहीं हो पा रहा तेलिया पोखरा

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पैमाइश के बाद चिन्हित किये गए थे अतिक्रणमित मकान
रोशन जायसवल,
बलिया।
आज से लगभग 200 वर्ष पुराना तेलिया पोखरा अपने जमाने का सबसे सुंदर पोखरा रहा है। चितबड़गांव क्षेत्र में शादी विवाह, छोटे बड़े आयोजनों व शुभ कामों के लिये तेलिया पोखरा का एक अलग ही पहचान थी क्योंकि वहां पर मृत्यंजय महादेव की प्राचीन मंदिर स्थापित है। जहां आज भी पूजा की जाती है।

इस पोखरे के जीर्णोद्वार के लिये उप्र शासन ने वर्ष 2024-2025 में बंधन योजना से लगभग एक करोड़ रूपये की धनराशि स्वीकृत की है। लेकिन शासन और प्रशासन के मंशा के अनुरूप तेलिया पोखरा पुराने अस्तित्व में तभी आएगा जब वह पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त होगा। जानकारी के अनुसार लगभग चार एकड़ में तेलिया पोखरा फैला हुआ है। पोखरे के चारों तरफ स्नान के लिये सीढ़ियां भी बनाई गई है और इसी सीढ़ी पर लोगों ने अपना पक्का मकान भी बनवा लिया है। जिसके कारण अपने पुराने स्वरूप में तेलिया पोखरा सामने नहीं आ पा रहा हैं। एसडीएम व तहसीलदार द्वारा लगातार पैमाइश होने के बाद अतिक्रमण किये गये मकानों को चिन्हित भी किया गया लेकिन मौजूदा तहसीलदार के उदासीनता के चलते तेलिया पोखरा की जमीन अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाई।

अभिलेख सुधार व अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू
उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित पीआईएल संख्या 9538/2025 (रामजी सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य) में पारित आदेश दिनांक 13 नवंबर 2025 के अनुपालन में तेलिया पोखरा की भूमि से अतिक्रमण हटाने की दिशा में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। पूर्व में पीआईएल संख्या 744/2021 में पारित आदेश के अनुपालन में उपजिलाधिकारी सदर बलिया द्वारा 7 सदस्यीय राजस्व टीम गठित कर तेलिया पोखरा की पैमाइश कराई गई थी। टीम की आख्या के आधार पर तालाब की भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत चितबड़ागांव को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
नगर पंचायत द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ अतिक्रमणकारियों ने उच्च न्यायालय में विभिन्न रिट याचिकाएं दाखिल कीं। इनमें कुछ मामलों में प्रत्यावेदन निस्तारण के आदेश दिए गए, जबकि एक रिट याचिका में स्थगन आदेश भी पारित हुआ। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में नगर पंचायत द्वारा सभी प्रत्यावेदनों का निस्तारण कर दिया गया है।
इस बीच क्षेत्रीय लेखपाल की आख्या में खतौनी एवं बन्दोबस्त अभिलेखों में त्रुटि सामने आई। लेखपाल के अनुसार आराजी संख्या 662, 668 व 670 से संबंधित अभिलेखों में सुधार आवश्यक है। विशेष रूप से आराजी संख्या 670 (नॉन जेडए) 1.50 हेक्टेयर भूमि तेलिया पोखरा के नाम से दर्ज है, जो मौके पर विद्यमान है।
लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत चितबड़ागांव ने उपजिलाधिकारी सदर बलिया को पत्र भेजकर अभिलेख दुरुस्त कराने का आग्रह किया। इसके बाद न्यायालय उपजिलाधिकारी सदर बलिया में धारा 38(1) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अंतर्गत वाद दर्ज किया गया है। प्रशासन का कहना है कि उक्त वाद के अंतर्गत अभिलेखीय त्रुटियों को सुधारते हुए तालाब एवं भीटा की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की विधिक कार्यवाही की जाएगी।

पैमाइश और चिन्हित के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इस संबंध में चितबड़ागांव के चेयरमैन अमरजीत सिंह ने कहा कि 2022 में तत्कालीन एसडीएम द्वारा तेलिया पोखरा की जमीन की पैमाइश कराई गई और अतिक्रमण किये मकानों को चिन्हित भी किये गये थे। उस समय अपन पक्ष रखने के लिये अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी की गई थी लेकिन अतिक्रमणकारी पक्ष न रखकर न्यायालय के शरण में चले गये थे। इसमें लगभग 32 मकानें चिन्हित की गई थी। फिर उसके बाद 2024 में तत्कालीन एसडीएम आत्रेय मिश्रा ने भी पैमाइश कराई गई, टीम गठित की गई और मौजूदा तहसीलदार सदर अतुल हर्ष ने पैमाइश की और अतिक्रमण को चिन्हित भी किया और उसके बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस काम के लिये मैं उनके यहां 10 बार गया लेकिन कोई सकारात्मक काम नहीं हुआ।


ऐतिहासिक तेलिया पोखरा को अतिक्रमण मुक्त कराकर बंधन योजना के तहत सुंदरीकरण कराने की कवायद होगी। इसके पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी जाएगी। शासन का भी निर्देश है कि गांवों के पोखरों और तालाबों का सुंदरीकरण किया जाए, शासन के मंशा के अनुरूप ही कार्य किया जाएगा।
-सुरेश मौर्य, अधिशासी अधिकारी चितबड़ागांव।

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