
रोशन जायसवाल,
बलिया। सदर विधानसभा की राजनीति से पहले नारद राय कोपाचीट विधानसभा की राजनीति में सक्रिय रहे। उनका नाम मुलायम सिंह यादव एवं जनेश्वर मिश्र के करीबियों में शामिल था। पूर्व मंत्री नारद राय ने अपने राजनीति की शुरुआत छात्र राजनीति से किया था और छात्र हित में संघर्ष भी किया। परिणाम स्वरूप 1982 में टीडी कालेज के छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इसके बाद 1983 में कोपाचीट (फेफना) की राजनीति में सक्रिय हुए और लोक दल से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन यहां सुरेश बहादुर सिंह को प्रत्याशी बना दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव एवं छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के कहने पर नारद राय बलिया विधानसभा से चुनाव लड़े।
उस समय एक घटना घटी, जब बाढ़ पीड़ितों ने नारद राय से शिकायत किया कि उन्हें राशन एवं किरासन तेल नहीं मिल रहा है। नारद राय नाव से बाढ़ पीड़ितों को लेकर फेफना स्थित बाढ़ चौकी पर आए और तहसीलदार से बाढ़ पीड़ितों को राशन देने की बात कही। लेकिन तहसीलदार ने उनकी नहीं सुनी। इस पर नारद राय एवं तहसीलदार के बीच मारपीट हो गई। इस मामले में नारद राय और उनके कुछ समर्थकों को फेफना थाना में बैठा दिया गया। इसकी जानकारी होने पर फेफना थाना पर भीड़ लग गयी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस मामले में नारद राय को करीब छह माह तक जेल में रहना पड़ा। वही, दूसरी घटना 2007 में सोहांव में उस समय हुई, जब ग्रामीण सेंट्रल बैंक आफ इंडिया को सोहांव से हटाकर भरौली करने पर विरोध प्रदर्शन कर चक्काजाम किये थे। उस समय तत्कालीन एसपी ने सोहांव में आंदोलन कर रहे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज करा दिया। इसमें कई लोग घायल हो गये। पुलिस घायलों का मेडिकल कराना नहीं चाहती थी।
सूचना पर पूर्व मंत्री नारद राय सोहांव पहुंचे और घायलों को अपनी गाड़ी में बैठाकर जिला अस्पताल ले जाने लगे। इसी बीच उनकी गाड़ी के आगे पुलिस खड़ी हो गयी। नारद राय ने पुलिस को धक्का देते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया और उनका मेडिकल कराया। अब फेफना विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री नारद राय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे ह। वह गांव-गांव जाकर लोगों से समर्थन मांग रहे है।

