
15 साल पहले राज्य गठन को लेकर कांग्रेस व बसपा सरकार थी गंभीर
रोशन जायसवाल,
बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल एक खास मायने रखता है और सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र भी माना जाता है। पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग लंबे समय से हो रही है। जिसमें उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, बुंदेलखंड व अवध प्रदेश बांटने की बात 2011 में की गई थी।
जिसमें मंडल और जिलों की सूची बनाई गई थी तथा किन-किन राज्यों में कितने विधानसभा शामिल होंगे इसके भी प्रस्ताव बनाए गए थे। अनुमान यह भी लगाया गया था कि पूर्वांचल राज्य में लगभग 125 से 150 के बीच विधानसभा शामिल हो सकते है। वैसे देश का सबसे बड़ा राज्य उप्र है। जहां 403 विधानसभा है।
प्रमुख प्रभाव
यदि 2011 के मायावती सरकार के प्रस्ताव को आधार माने तो पूर्वांचल एक विशाल राज्य होगा जिसकी आबादी और राजनीतिक शक्ति कई वर्तमान राज्यों जैसे हरियाणा व पंजाब से अधिक होगी। लखनऊ से अत्यधिक दूरी होने के कारण सुदूरपूर्वी जिलों बलिया, सोनभद्र का विकास और प्रशासनिक निगरानी कठिन होती है। औद्योगिक विकास के मामले में यह क्षेत्र पश्चिमी यूपी के तुलना में काफी पीछे है। बलिया की मुख्य भाषा भोजपुरी है और बलिया के लोग अपनी अलग पहचान भोजपुरी भाषा राज्य के लिए मांग भी कर रहे है। पूर्वाचल राज्य बनने से बलिया की सबसे मुख्य समस्या गंगा और घाघरा से होने वाले कटान व बाढ़ से निजात, सड़क, बिजली, पानी की समुचित व्यवस्था मेडिकल क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा और सबसे बडी बात यह होगी कि पूर्वांचल पर शासन की पूरी निगाह होगी जो लखनऊ से काफी दूर पड़ता है पूर्वांचल जिसके कारण विकास और लायन आर्डर जैसी समस्याओं पर प्रशासन की निगाह ठीक नहीं पड़ पाती है।
तीन राज्यों में उप्र के बांटने की संभावना
बलिया। तीन राज्यों में उत्तर प्रदेश का बांटने की संभावना है। जिसमें बुंदेलखंड, पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश है। सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हुअ था जिसमें उत्तर प्रदेश को 20 जिले, बुंदेलखंड को 17 और पूर्वांचल को 23 जिलों में शामिल किया गया था। शेष बचे जनपदों को उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड से सटे सीमाओं वाले राज्यों हरियाणा, उत्तराखंड में शामिल करना था। हरियाणा में सहारनपुर मंडल के तीन जिले, उत्तराखंड में मुरादाबाद मंडल के सभी जिले, दिल्ली राज्य में सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरूग्राम, रेवाड़ी, पलपल, फरीदाबाद इन सभी जिले को दिल्ली राज्य में शामिल करने की योजना थी। इसके अलावा मेरठ मंडल के बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ को भी दिल्ली राज्य में शामिल करने की योजना पत्र में दर्शाया गया है।

अखिलेश व योगी सरकार ने दिखाई होती रूचि तो बन जाता पूर्वांचल राज्य
इस संबंध में कप्तान उपाध्याय ने कहा कि 2012 में बसपा सरकार चली गई तो उनका आंदोलन थमा नहीं और 2013 में भी जंतर मंतर दिल्ली में प्रदर्शन चलता रहा। श्री उपाध्याय ने कहा कि जिस तरह बसपा सरकार ने पूर्वांचल राज्य के लिए रूचि दिखाई उसी तरह से अखिलेश और योगी सरकार ने भी रूचि दिखाई होती तो पूर्वांचल राज्य बन गया होता। सबसे हैरत की बात यह है कि उत्तर प्रदेश और केंद्र में भाजपा की डबल इंजन की सरकार है और काशी में प्रधानमंत्री और गोरखपुर में मुख्यमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और दोनों लोग पूर्वांचल में ही अपना झंडा बुलंद किए है लेकिन पूर्वांचल राज्य के लिए अपनी विशेष रूचि नहीं दिखा रहे है लेकिन पूर्वांचल विकास मंच अपने आंदोलन को और धार देगा और फिर आंदोलन की राह अपनाएगा जिसमें उन्होंने पूर्वांचल वासियों से सहयोग की अपेक्षा की है।

पूर्वांचल राज्य की स्थापना जरूरी, तभी साकार होगा विकसित भारत 2047 का सपना: डॉ. एचएन शर्मा
बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार रहे डॉ. एचएन शर्मा ने पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल जैसे पिछड़े इलाके के समुचित विकास के लिए अलग राज्य का गठन अनिवार्य हो गया है। डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो लक्ष्य रखा है, वह तभी संभव है जब देश के सभी क्षेत्रों का समान रूप से विकास हो। उन्होंने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास हुआ है। डॉ. शर्मा का कहना है कि यदि इसी तरह की योजनाएं पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में लागू करनी हैं, तो प्रशासनिक दृष्टि से अलग राज्य का गठन बेहद जरूरी है।

काशी हो पूर्वांचल की राजधानी: योगेश्वर सिंह
पूर्वांचल राज्य के गठन को लेकर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के नेता योगेश्वर सिंह ने कहा कि पूर्वांचल राज्य का गठन होना चाहिए वो इसलिए कि पूर्वांचल में अभी भी उद्योग धंधों की भारी कमी दिख रही है जिसके कारण लोग अपने परिवार को छोड़ कर बड़े शहरों में नौकरी कर रहे है। कोई अपना खेत तो कोई अपना घर तो कोई अपनी जन्मभूमि छोड़कर बाहर है क्योंकि पूर्वांचल में बनारस और गोरखपुर छोड़ दिया जाए तो आज भी अन्य जनपद विकास की बाट जोह रहा है। पूर्वांचल राज्य बनने से विशेष पैकेज और विशेष योजनाओं से पूर्वांचल चमक जाएगा। साथ ही विकास की रफ्तार में पूर्वांचल राज्य सबसे आगे हो जाएगाा क्योंकि आज भी हम शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत बेहतर नहीं है। मेरी राय यही होगी कि पूर्वांचल की राजधानी काशी हो।

पूर्वांचल के समुचित विकास के लिए अलग राज्य का गठन जरूरी: डॉ. शिवकुमार सिंह
बलिया। वरिष्ठ साहित्यकार डा. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने पूर्वांचल राज्य के गठन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अलग राज्य बनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश की आजादी की लड़ाई में पूर्वांचल के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसी तरह आज इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाना भी जरूरी है। डॉ. कौशिकेय ने कहा कि पूर्वांचल ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र रहा है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उत्तर प्रदेश का विभाजन होता है, तो पूर्वांचल राज्य का गठन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। अलग राज्य बनने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलेगी

