
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (जेएनसीयू) के नए भवनों के हैंडओवर को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। शासन स्तर पर गठित जांच समिति ने मंगलवार और बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर नए भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम को कई तकनीकी खामियां मिलीं, जिसके बाद हैंडओवर प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता के तबादले को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 70 से 78 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम चरण में प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, लाइब्रेरी, कुलपति आवास समेत कुल सात भवनों का निर्माण कराया गया है। इन भवनों का निर्माण लोक निर्माण विभाग, आजमगढ़ द्वारा कराया गया। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन लंबे समय से निर्माण कार्य में तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाता रहा है।

निरीक्षण के दौरान मिली ये खामियां
जांच समिति ने निरीक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई मानक के अनुरूप न होने, इंटरलॉकिंग कार्य में कमियां, एकेडमिक भवन, लाइब्रेरी और कुलपति आवास से जुड़े निर्माण कार्यों में त्रुटियां मिलने पर आपत्तियां दर्ज कीं। सूत्रों के अनुसार इन्हीं खामियों के कारण भवनों का औपचारिक हैंडओवर अब तक नहीं हो सका है। इसके चलते भवनों के उपयोग पर भी रोक लगी हुई है, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
निर्माण एजेंसी का दावा, सबकुछ ओके
वहीं निर्माण एजेंसी का दावा है कि सभी भवन निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन को हस्तांतरित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार गुणवत्ता और मानकों को लेकर सवाल उठाता रहा है।
कुलपति के तबादले पर चर्चाएं तेज
इसी बीच कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता के तबादले को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि उनका तीन वर्षीय कार्यकाल पूरा होने के बाद शासन ने छह माह का सेवा विस्तार दिया था, लेकिन इसी दौरान उनका तबादला होने से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लोगों के बीच यह चर्चा है कि कहीं भवन हैंडओवर और जांच प्रक्रिया की आंच में यह फैसला तो नहीं लिया गया।
जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
विश्वविद्यालय परिसर में दो दिनों तक चले निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी स्तर पर गठित समिति के सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठक कर हैंडओवर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा भी की। अब समिति की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

