
पारंपरिक वोट बैंक को साधे रखने एवं विपक्ष के दांव को काटने की तैयारी
रोशन जायसवाल
बलिया। वैसे तो बलिया में कुल सात विधानसभा है। बेल्थरारोड (सु.) को छोड़कर शेष छह विधानसभा रसड़ा, फेफना, सिकंदरपुर, बैरिया, बांसडीह, बलिया नगर में भाजपा के लिए ओबीसी चेहरों को आगे बढ़ाना केवल एक चुनावी जरूरत नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा है। हाल के चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी इस बात को अच्छी तरह समझ चुकी है कि पूर्वांचल खासकर बलिया में बिना मजबूत ओबीसी चेहरों के चुनावी नैया पार लगना मुश्किल है।
भाजपा नेतृत्व यह साफ मानकर चल रहा है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले को काटने के लिए पार्टी को अपने खुद के मजबूत ओबीसी लीडर्स की एक बड़ी फौज खड़ी करनी होगी। पार्टी अब केवल कुछ पारंपरिक सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती। उसकी सोच यह है कि गैर-यादव ओबीसी (जैसे वैश्य, राजभर, चौहान, बिंद, मौर्य, कुर्मी आदि) को बलिया की सामान्य सीटों पर भी बड़ा प्रतिनिधित्व दिया जाए।
भाजपा बलिया में केवल सवर्ण (ब्राह्मण, राजपूत) और दलित (सुरक्षित सीट) के पुराने त्रिकोण से आगे निकलकर एक ऐसा सामाजिक समीकरण बनाना चाहती है, जो हर विधानसभा सीट पर जीत की गारंटी बन सके। बलिया और आस-पास के जिलों में सपा ने गैर-यादव ओबीसी और दलितों को जोड़कर एक नया नैरेटिव सेट किया है। भाजपा अगर अपने बैनर तले वैश्य, राजभर, चौहान या अन्य पिछड़ी जातियों के कद्दावर चेहरों को टिकट देती है तो वह सपा के इस वोट बैंक में सीधी सेंधमारी कर सकती है। फिलहाल पूर्वांचल में भाजपा को सुभासपा, निषाद पार्टी या अपना दल (एस) जैसे क्षेत्रीय दलों पर काफी निर्भर रहना पड़ता है। अगर भाजपा अपने खुद के संगठन से मजबूत ओबीसी नेता तैयार कर उन्हें टिकट देती है तो बलिया जनपद में पार्टी का अपना कैडर और स्वतंत्र आधार बहुत ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
नये ओबीसी चेहरों को मौका देने की तैयारी
बलिया। अक्सर पुराने चेहरों को लेकर जनता में थोड़ी नाराजगी होती है। बलिया जनपद की कुछ सीटों पर नए, युवा और जुझारू ओबीसी चेहरों को मौका देकर भाजपा न सिर्फ नए वोटर्स को आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली एंटी-इन्कंबेंसी को भी आसानी से बेअसर कर देगी। बांसडीह एवं बैरिया में वैश्य, राजभर, चौहान और अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने का दम रखती है।
सिकंदरपुर, फेफना में यादव और गैर-यादव ओबीसी मतदाता सबसे बड़ी निर्णायक भूमिका में होते हैं। रसड़ा में दलित और पिछड़ी जातियों का गठजोड़ हमेशा से हावी रहा है। बलिया नगर विधानसभा सवर्ण बहुल मानी जाती है, लेकिन यहां भी शहर और देहात के ओबीसी मतदाता जीत का मार्जिन तय करते हैं।
टिकट की दौड़ में कई ओबीसी चेहरे
बलिया। सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से ओबीसी चेहरों में पूर्व विधायक संजय यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष देवेन्द्र यादव एवं डा. विजय रंजन के नाम की चर्चा है। इसी क्रम में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान, बैरिया से शिवकुमार वर्मा मंटन भाजपा से टिकट की दौड़ में है। इसके अलावा और भी ओबीसी चेहरे टिकट की दौड़ में है।

