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Ballia : विधानसभा चुनाव 2027: डा.सुषमा, केतकी, विजयलक्ष्मी, रूबी, मनोरमा, रीना, किरण उतरीं मैदान में

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रोशन जायसवाल,
बलिया।
आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में है। वर्ष 2025 समापन की ओर है। 2026 वर्ष में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी रफ्तार पकड़ेगी। ऐसे में जिले के कुल सात विधानसभाओं में महिला दावेदारों की संख्या बढ़ चुकी है। विभिन्न विधानसभाओं में महिला दावेदार काफी मेहनत कर रही है और उनके नामों की चर्चा जोर शोर से चल रही है। बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से विधायक केतकी सिंह के अलावा मनोरमा गुप्ता भी तैयारी में है।

बिल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र से रीना राव भी रेस में देखी जा रही है। वहीं बैरिया विधानसभा सीट से विजय लक्ष्मी सिंह व रूबी सिंह भी मेहनत कर रही है। फेफना विधानसभा सीट से डा. सुषमा शेखर व कृष्णा पांडेय भी जनसंपर्क में जुटी है। वहीं सिकंदरपुर विधानसभा सीट से उर्मिला सिंह व कुसुम चौहान की भी होर्डिंग देखी जा रही है। रसड़ा विधानसभा सीट से किरण सिंह की लड़ने की चर्चा हो रही है। ये सभी दावेदार अपने-अपने क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी से टिकट मांग रही है।

कुछ ऐसे भी दावेदार है जो चुनाव लड़ने की बात नहीं कर रहे है लेकिन विधानसभाओं में जमे हुए है। मौजूदा समय में कुल सात विधानसभाओं में एकमात्र बांसडीह विधानसभा सीट से निषाद पार्टी व भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशी केतकी सिंह विधायक है।

पूर्व सांसदों के पुत्र व पुत्री भी उतरे मैदान में
बैरिया विधानसभा सीट से दो पूर्व सांसदों के पुत्र व पुत्री भी चुनाव मैदान में उतरेंगे। पूर्व सांसद भरत सिंह की पुत्री विजय लक्ष्मी सिंह व पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के पुत्र डा. विपुलेंद्र प्रताप सिंह के विधानसभा चुनाव में लड़ने की चर्चा हो रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री की पुत्रवधु की भी लड़ने की चर्चा
पूर्व प्रधानमंत्री स्व.चंद्रशेखर की पुत्रवधु डा. सुषमा शेखर फेफना विधानसभा क्षेत्र से काफी चर्चा में है। वह दिन रात मेहनत कर रही है। हालांकि सांसद नीरज शेखर ने सुषमा शेखर को लेकर चुनाव लड़ने का कोई बयान नहीं दिया है, वहीं सुषमा शेखर भी चुनाव लड़ने की बात सार्वजनिक रूप से नहीं कही है। लेकिन उनके समर्थक उनके नाम का डंका बजा रहे है।

आखिर नारद क्यों गये फेफना में, हो रही चर्चा
बलिया नगर विधानसभा सीट से दो बार विधायक व दो बार मंत्री रहे नारद राय ने आखिर बलिया विधानसभा क्यों छोड़ी, ये सवाल बलिया व फेफना के राजनीतिक गलियारों में तेजी से गूंज रहा है। नारद राय 1980 में टीडी कालेज की छात्र राजनीति से निकले और उसके बाद 1984 में पहली बार लोकदल पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़े। 1993 के आसपास वह सपा-बसपा गठबंधन से चुनाव लड़े। फिर 2002 में पहली बार सपा से विधायक बने।

उसके बाद मुलायम सरकार में मंत्री भी बने। 2007 में हारे और 2012 में फिर चुनाव जीते। उसके बाद 2017 में बसपा से चुनाव लड़े और हार गये। वहीं 2022 में सपा से चुनाव लड़े उसमें ंभी सफलता नहीं मिली। कुल सात बार विधानसभा चुनाव लड़े और दो बार उन्हें विधानसभा में जाने का मौका मिला। मुलायम सिंह और अखिलेश सरकार में मंत्री भी बने। जनेश्वर मिश्र के सानिध्य में आकर राजनीति में आगे बढ़े। लेकिन बलिया विधानसभा छोड़कर फेफना विधानसभा की राजनीति में जाने के पीछे पूर्व मंत्री की क्या सोच है इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है।

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