
रोशन जायसवाल,
बलिया। बलिया की आबादी करीब 40 लाख है और जिले के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बैरिया, हल्दी, रेवती, सिकंदरपुर, रसड़ा और जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी पहले से मिल सके, इसके लिए जिला अस्पताल में एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर होना बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि अगर किसी मरीज को अस्पताल आने से पहले ही फोन पर जरूरी जानकारी मिल जाए तो उसका समय, पैसा और परेशानी तीनों बच सकते हैं।
हेल्पलाइन पर कौन-कौन सी जानकारी मिलनी चाहिए?
सरकार की ओर से कौन-कौन सी दवाएं उपलब्ध हैं और कौन सी दवा फिलहाल स्टॉक में है?
कौन-कौन सी जांच सरकारी अस्पताल में निशुल्क अथवा निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध है?
किस बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में हैं और किस दिन कौन से डॉक्टर ओपीडी में उपलब्ध रहेंगे?
किस विभाग की ओपीडी कितने बजे से कितने बजे तक चलेगी?
अस्पताल में इस समय कितने बेड खाली हैं और मरीज को भर्ती कराने की प्रक्रिया क्या है?
किस बीमारी के ऑपरेशन किस दिन होते हैं और इसके लिए मरीज को क्या प्रक्रिया पूरी करनी होगी?
अस्पताल में मरीजों को सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं?
छोटी शिकायत का भी हो तत्काल समाधान
अगर किसी वार्ड में बेड की चादर बदलनी हो, सफाई की जरूरत हो, शौचालय गंदा हो या मरीज को अस्पताल की किसी सुविधा को लेकर परेशानी हो तो हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज हो और उसका शिकायत नंबर मरीज को दिया जाए। इसके बाद यह भी व्यवस्था हो कि शिकायत का समाधान कितने समय में हुआ, इसकी निगरानी की जाए।
आखिर हेल्पलाइन से क्या बदलेगा?
इस व्यवस्था से मरीजों को बार-बार अस्पताल आने, अलग-अलग काउंटर पर जानकारी लेने और कर्मचारियों से पूछताछ करने की जरूरत कम होगी। खासकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए यह बड़ी राहत होगी। जिला अस्पताल में एक ऐसा हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए, जहां फोन उठाने वाला व्यक्ति मरीज को सही जानकारी दे और जरूरत पड़ने पर उसकी शिकायत भी दर्ज करे।

