
बलिया। 20 अगस्त को देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतरत्न राजीव गांधी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया। राजीव गांधी को आधुनिक भारत की सोच, युवा ऊर्जा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी बदलावों को बढ़ावा देने वाले नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन, शिक्षा, संचार, विज्ञान एवं तकनीक तथा स्थानीय स्वशासन जैसे क्षेत्रों में बदलाव की दिशा में प्रयास किए। उनका मानना था कि भारत को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक को आम नागरिक तक पहुंचाना और युवाओं को विकास की प्रक्रिया में अधिक अवसर देना आवश्यक है।
पंचायती राज को मजबूत करने की पहल
राजीव गांधी की प्रमुख पहलों में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास भी शामिल रहा। उनका विश्वास था कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत गांवों तक पहुंचनी चाहिए और ग्रामीण जनता को स्थानीय विकास से जुड़े निर्णयों में अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। उनके प्रयासों ने आगे चलकर स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज और नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला।
सूचना और संचार क्रांति की रखी आधारभूमि
राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में सूचना एवं संचार क्रांति की शुरुआती आधारभूमि तैयार करने के लिए भी याद किया जाता है। दूरसंचार और कंप्यूटर तकनीक को बढ़ावा देने के साथ ही संचार सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों तक टेलीफोन और संचार सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयास हुए। उस दौर में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक को लेकर बहस जरूर हुई, लेकिन राजीव गांधी का मानना था कि आने वाला समय विज्ञान, तकनीक और सूचना का होगा तथा भारत को इसके लिए पहले से तैयार रहना चाहिए।
शिक्षा और युवाओं को दिया महत्व
राजीव गांधी शिक्षा और युवा शक्ति को देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार मानते थे। उनके कार्यकाल में 1986 की नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और आधुनिक विषयों को बढ़ावा देने की दिशा में पहल हुई। उनका मानना था कि भारत की युवा आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और आधुनिक अवसर उपलब्ध कराकर देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
युवाओं की लोकतंत्र में बढ़ी भागीदारी
मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का निर्णय भी राजीव गांधी के कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 के बाद 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदान का अधिकार मिला। इससे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी का रास्ता खुला।
राजीव गांधी का दृष्टिकोण केवल तकनीक और प्रशासन तक सीमित नहीं था। वे वैज्ञानिक सोच, आधुनिकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भारत को तैयार करना चाहते थे। उनका सपना ऐसा भारत बनाने का था जो अपनी परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखते हुए विज्ञान एवं तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े।
राजीव गांधी जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम शिक्षा और तकनीक को जन-जन तक पहुंचाने, युवाओं को अवसर देने, लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने तथा सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को कायम रखने के प्रयासों में अपना योगदान दें। आधुनिक भारत की उनकी परिकल्पना आज भी देश की बदलती विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण विचार के रूप में याद की जाती है।
अबुल फैज, कांग्रेस नेता
बलिया (उ.प्र.)

