
मिर्जापुर। प्रख्यात इतिहासकार, पुरातत्वविद् एवं भारतीय इतिहास लेखन के अग्रणी विद्वान डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल की स्मृति में मिर्जापुर नगर के टाउन सिटी क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए इतिहासकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं जायसवाल समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के जीवन, व्यक्तित्व और भारतीय इतिहास लेखन में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. जायसवाल ने भारतीय इतिहास को नई दृष्टि प्रदान की और प्राचीन भारत की गौरवशाली परंपराओं को प्रमाणिक रूप से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उनके शोध कार्य आज भी इतिहास के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के गृह जनपद मिर्जापुर में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज तथा विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से परिचित हो सकें। इसके साथ ही मिर्जापुर नगर में किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग उठाई गई।

वक्ताओं ने कहा कि देश के अनेक महापुरुषों के नाम पर संस्थान स्थापित किए गए हैं, लेकिन भारतीय इतिहास लेखन को नई दिशा देने वाले डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के सम्मान में अभी तक उनके गृह जनपद में कोई बड़ा संस्थान नहीं है। यह मिर्जापुर ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय होगा यदि मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थानों का नाम उनके नाम पर रखा जाए।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सरकार से इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। साथ ही डॉ. जायसवाल के जीवन एवं कृतित्व को विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में अधिक महत्व दिए जाने की भी मांग की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके आदर्शों और बौद्धिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

