
रमेश जायसवाल,
सिकंदरपुर (बलिया)। सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से नीचे पहुंचकर स्थिर हो गया है, लेकिन इसके साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में कटान ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी अब गांवों की कृषि योग्य भूमि को तेजी से अपने आगोश में ले रही है। कटान की भयावह स्थिति से किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। यदि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में कई गांवों की खेती और आबादी पर संकट गहरा सकता है।
कटान का सबसे अधिक असर डूहा विहरा, कठौड़ा, खरीद, पुरुषोत्तम पट्टी, जिन्दापुर, निपानिया, गोसाईपुर सहित दियारा क्षेत्र के कई गांवों में देखा जा रहा है। यहां उपजाऊ खेत लगातार नदी में समा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई जमीन देखते ही देखते नदी में विलीन हो रही है, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार 23 जुलाई की सुबह 8 बजे सरयू नदी का जलस्तर 63.47 मीटर दर्ज किया गया था, जो 1 अगस्त की सुबह 8 बजे घटकर 63.12 मीटर पर पहुंच गया।
नदी का खतरा बिंदु 64.010 मीटर निर्धारित है। जलस्तर में गिरावट के साथ ही नदी का बहाव किनारों पर दबाव बना रहा है, जिसके कारण कटान की रफ्तार बढ़ गई है। कटान से प्रभावित ग्रामीणों, किसान संगठनों और समाजसेवियों ने शासन से स्थायी ठोकर (स्पर) निर्माण की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ और कटान के समय अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने के कारण हजारों बीघा उपजाऊ भूमि नदी में समाती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी कटानरोधी परियोजना शुरू नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में कई गांवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
कुछ दिन पूर्व सिकंदरपुर विधायक मोहम्मद ज़ियाउद्दीन रिज़वी ने स्टीमर से कटान प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। उन्होंने प्रभावित किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान का मुद्दा विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया था। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कटान का दायरा लगातार बढ़ता जाएगा और इसका सीधा असर खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा। अब प्रभावित गांवों के लोग शासन से राहत नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

