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Ballia : भरत-राम मिलन का प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, राजन जी महाराज ने सुनाई मार्मिक कथा

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सुधीर कुमार मिश्रा,
बेरुआरबारी (बलिया)।
बेरुआरबारी क्षेत्र के बाबा अमरनाथ करिहरा मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन के बाद हुए भरत-राम मिलन के अत्यंत मार्मिक प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।


महाराज ने बताया कि जब केवट भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराकर अपनी भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब आगे चलकर चित्रकूट में भगवान श्रीराम और उनके छोटे भाई भरत का मिलन भारतीय संस्कृति में त्याग, प्रेम और धर्मपालन का अद्वितीय आदर्श बनकर सामने आता है। उन्होंने कहा कि जब भरत को अयोध्या लौटने पर पिता महाराज दशरथ के निधन और भगवान श्रीराम के वनवास का समाचार मिला, तो वे अत्यंत व्यथित हो गए।
उन्होंने स्वयं को इस घटना के लिए दोषी मानते हुए राज्य स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बाद गुरुजनों, माताओं, मंत्रियों और अयोध्यावासियों के साथ चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया।

कथावाचक ने बताया कि चित्रकूट में दोनों भाइयों का मिलन इतना भावुक था कि वहां उपस्थित ऋषि-मुनि, देवगण और समस्त जनसमूह की आंखें नम हो गईं। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजसिंहासन संभालने की प्रार्थना की, लेकिन भगवान श्रीराम ने पिता के वचन और रघुकुल की परंपरा का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराया।


राजन जी महाराज ने कहा कि अंततः भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे और उन्हें सिंहासन पर विराजमान कर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी के समान जीवन व्यतीत करते हुए केवल सेवक और प्रतिनिधि के रूप में राज्य का संचालन किया। उन्होंने कहा कि भरत का त्याग, समर्पण और भाई के प्रति निष्कलंक प्रेम आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस दौरान मुख्य रूप से कुंवर राकेश सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष एनएस सिटी प्रयागराज, शशि प्रकाश पांडे, रोहित सांकृत्यायन वाराणसी, डॉ अभिषेक सिंह, क्षेत्रीय विधायक केतकी सिंह, विश्राम सिंह, शांत स्वरूप सिंह, ननकू सिंह नारायण सिंह, रमेश सिंह, मिथुन सिंह,राजेश दुबे, ईश्वर दयाल मिश्रा, केडी सिंह आदि लोग रहे।

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