
ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी के बीच भटकते रहे परिजन; जांच के आदेश
बलिया। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवक की जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी के चिकित्सक एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर मरीज को देखने से इंकार करते रहे, जिसके चलते समय पर उपचार नहीं मिल सका और युवक ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
जानकारी के अनुसार, फेफना थाना क्षेत्र के खोरीपाकर गांव के पास बृहस्पतिवार की सुबह एक ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार अविनाश प्रजापति (38) गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सक मौजूद नहीं थे। ऐसे में वे घायल अविनाश को लेकर ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी के बीच चक्कर लगाते रहे। आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने मरीज को ट्रॉमा सेंटर का मामला बताते हुए देखने से इंकार कर दिया, जबकि ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। इसी दौरान दर्द से तड़प रहे अविनाश की मौत हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए लापरवाह चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रित किया। काफी देर तक अस्पताल परिसर में गहमागहमी का माहौल बना रहा।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. एस.के. यादव ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

