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Ballia : सुरहाताल के विकास में जेएनसीयू करेगा योगदान : कुलपति

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बलिया। जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य, सुरहा ताल को देश का 100वां रामसर स्थल चुना गया है। यह स्थान प्रवासी पक्षियों एवं स्थानीय पक्षियों की शरणस्थली है। इसका आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु बनी रामसर सूची में सम्मिलित होना बलिया एवं विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। सुरहा ताल का अपना ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व है। कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने प्रधानमंत्री का आभार जताया कि उन्होंने सुरहा ताल एवं उसके विकास के प्रति समर्पण जताया है। कुलपति ने राज्यपाल/ कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि गण का आभार जताया है कि उनके प्रयत्नों से सुरहा ताल को आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु बनी विशिष्ट रामसर सूची में सम्मिलित किया गया है।


कुलपति ने कहा कि जेएनसीयू सुरहा ताल के तट पर अवस्थित है और क्षेत्र के विकास के लिए अपना पूरा योगदान देगा। कहा कि सुरहा ताल केवल एक आर्द्रभूमि नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर, समृद्ध जैव विविधता एवं पर्यावरणीय संतुलन का जीवंत प्रतीक है। यह उपलब्धि बलिया को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगी। पर्यटन विभाग के विद्यार्थियों के लिए भी अध्ययन एवं अनुभव के लिए नये अवसर प्राप्त होंगे।
कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी का हार्दिक आभार जताने के साथ यह आश्वासन भी दिया कि जेएनसीयू के प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं एनएसएस, एनसीसी के सदस्य तथा रोवर्स/ रेंजर्स इस क्षेत्र की वानस्पतिक विविधता एवं प्रकृति के संरक्षण के लिए सर्वदा सन्नद्ध रहेंगे। विवि क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर स्थानीय कृषि, कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध कराने के साथ आवश्यक सहयोग भी करेगा।

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