
ब्राह्मण चेहरों में मनोज पांडेय व श्रीकांत शर्मा भी
रोशन जायसवाल,
बलिया। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल के विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है। संभावना है कि सात मई के बाद कभी भी नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। इस संभावित विस्तार में क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है। खासकर सपा के पीडीए के जवाब में बीजेपी दलित व पिछड़ों को मंत्रिमंडल में मौका देगी। अगर बैकवर्ड चेहरों की बात करें तो पूजा व कृष्णा पासवान को मौका मिल सकता है। इसके पीछे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संदेश को जमीन पर उतारने के लिए महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है।
दलित और पिछड़ों को वर्गों को प्राथमिकता देकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा समीकरण तैयार कर रही है। ऐसे में ब्राह्मण चेहरों में रायबरेली उंचाहार से विधायक और सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए मनोज पांडेय को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है। एक नाम श्रीकांत शर्मा का भी है जो योगी के पहली सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रह चुके है और महिला में कृष्णा पासवान फतेहपुर की विधायक है जो महिला और दलित पासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए इनका नाम सबसे आगे है। वहीं आशा मौर्या जो महमुदाबाद की विधायक है, इनके नाम की भी चर्चा है। वहीं सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ के विधायक है, जो वाल्मीकि समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे है। कुछ ऐसे भी जो सरकार में मंत्री है उनको संगठन में जिम्मेदारी मिल सकती है जैसा की चर्चा है।
योगी सरकार का मंत्रिमंडल
सुरेश खन्ना वित्तीय एवं संसदीय कार्य मंत्री
सूर्य प्रताप शाही, कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री
स्वतंत्रता देव सिंह, जलशक्ति मंत्री
देवी रानी मौर्य, महिला कल्याण एवं बाल विकास
अरविंद कुमार शर्मा, नगर विकास ऊर्जा,
नंदगोपाल गुप्ता नंदी, औद्योगिक विकास
ओमप्रकाश राजभर, पंचायती विभाग
असीम अरूण, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री
नितीश अग्रवाल, आबकारी एवं मद्य निषेध
संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा
कपिल देव अग्रवाल, व्यवसायिक एवं कौशल शिक्षा विकास
अरूण कुमार सक्सेना, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन
बलदेव सिंह औलख, राज्यमंत्री, कृषि, एवं कृषि शिक्षा
मयंकेश्वर शरण सिंह, संसदीय कार्य एवं चिकित्सा शिक्षा
संजय सिंह गंगवार, गन्ना विकास एवं चीनी मिल
सोमेंद्र तोमर, ऊर्जा मंत्री
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 50 से अधिक मंत्री शामिल है। जिसमें कुछ महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के भी पास है। ऐसे में पीडीब्ल्यूडी विभाग भी मुख्यमंत्री के पास है। संभावना है कि नए मंत्रिमंडल के विकास में पीडब्ल्यूडी विभाग किसी नए मंत्री को मिल सकता है।

