
बलिया। सनबीम स्कूल, बलिया के जोश ग्राउंड में रविवार को एक विशेष सांस्कृतिक संध्या ‘अंतर्यात्रा’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित दर्शकों ने इतिहास के झरोखों और साहित्य की गहराई का जीवंत अनुभव किया। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी प्रणब मुखर्जी के निर्देशन और परिकल्पना में तैयार इस नाटक ने इतिहास के चार खंडों को ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता केदारनाथ सिंह की कविताओं के साथ खूबसूरती से पिरोया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह (पूर्व कुलपति, जे.पी. विश्वविद्यालय, बिहार एवं पूर्व संकाय अध्यक्ष, शिक्षा संकाय, बीएचयू) और विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर (प्रसिद्ध कवि और गीतकार, बलिया के लाल) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। उसके बाद विद्यालय के निदेशक डॉ कुंवर अरुण सिंह और सचिव श्रीवत्स सिंह ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह से सम्मान किया तथा प्रधानाचार्या डॉ अर्पिता सिंह ने विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर का स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया।
बता दें कि नाट्य प्रस्तुति अंतर्यात्रा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्री प्रणब मुखर्जी के कुशल निर्देशन में विद्यालय के बाल कलाकारों ने केदारनाथ सिंह की कविताओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। इस दौरान प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभाव ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।

पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कार्यक्रम को किया संबोधित
कार्यक्रम में आए सभी दर्शकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजन छात्रों में सांस्कृतिक चेतना और कला के प्रति प्रेम जागृत करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को स्वाध्याय के लिए प्रेरित करते हुए कई महत्वपूर्ण पुस्तकों के नाम सुझाए और जोर देकर कहा कि पुस्तकों का पठन व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनिवार्य है। अपने ओजपूर्ण संबोधन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, गायत्री मंत्र और श्री दुर्गा सप्तशती के श्लोकों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को साझा किया और विद्यार्थियों को इन आध्यात्मिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारने के लिए प्रोत्साहित किया।
डा.सागर ने अपनी कठिन यात्रा की सुनाई कहानी
विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर ने अपने संबोधन में अपने जीवन के संघर्षों और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों का सजीव चित्रण साझा कर विद्यार्थियों को भावुक और प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई के ग्लैमर और सिनेमा जगत (बॉलीवुड) में अपनी पहचान बनाना एक कठिन यात्रा रही, लेकिन दृढ़ निश्चय से हर लक्ष्य संभव है। बलिया के लाल कहे जाने वाले डॉ. सागर ने महान साहित्यकार केदारनाथ सिंह के साथ बिताए आत्मीय पलों और उनके क्रांतिकारी विचारों को याद करते हुए कहा कि केदार जी की कविताएँ और उनका सान्निध्य ही उनकी असली प्रेरणा रहे हैं।
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पं. राजकुमार मिश्रा, पवन तिवारी, डॉ. फतेहचंद बेचैन, श्वेता पांडेय मिश्रा और सुशीला पाल, शिवकुमार सिंह कौशिकेय, श्वेतांक सिंह, प्रोफेसर डॉ. मंजीत सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान रमेश चंद्र द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। अंत में हेडमिस्ट्रेस नीतू पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

